नई दिल्ली: महान सचिन तेंदुलकर वैसे तो रिटायरमेंट तक शानदार खेलते रहे, लेकिन वह 1996 से 2004 के बीच जितना खतरनाक थे उतना खतरनाक शायद ही कोई बल्लेबाज होगा। हर गेंदबाज उनसे कांपता था। हालांकि, उनके लिए गोल्डन ईयर 1998 रहा। इस साल उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में 39 मैचों की 42 पारियों में 68.67 की औसत से विध्वंसक बैटिंग करते हुए 2541 रन ठोके, जबकि 12 शतक और 8 हाफ सेंचुरी उनके नाम थी। इस साल उन्होंने वनडे में 34 मैचों में 65.31 की औसत और 102.15 के स्ट्राइक रेट से 1894 रन बरसाए। इसमें 9 शतक और 7 अर्धशतक थे। उस समय टीम के कोच अंशुमान गायकवाड़ थे, जो फिलहाल ब्लड कैंसर से लड़ रहे हैं।
एक ओर विश्व विजेताओं पर धन वर्षा, दूसरी ओर पूर्व की आर्थिक तंगी
यह भी अपने आप में बड़ी बात है कि टीम इंडिया टी20 विश्व कप विजेता बनी है और उसके लिए बीसीसीआई ने 125 करोड़ रुपये इनामी राशि दी। टीम इंडिया के हेड कोच राहुल द्रविड़ हें, जो खुद अंशुमान गायकवाड़ की कोचिंग वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। 71 साल के अंशुमान लंदन में हैं और किंग्स कॉलेज हॉस्पिटल में कैंसर को हराने के लिए लगातार लड़ रहे हैं। इस बीच टीम इंडिया के कई पूर्व क्रिकेटरों ने अपने दोस्त की सलामती के लिए कामना की है और साथ ही बीसीसीआई से गुहार लगाई है कि दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड अंशुमान की आर्थिक मदद करे।
ब्लड कैंसर से लड़ रहा भारत का धाकड़, सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली से राहुल द्रविड़ तक के रहे 'गुरु'











