कच्चे तेल के लिए हर बैरल पर कीमत से $22 ज्यादा चुका रही भारतीय कंपनियां, जान लीजिए वजह

कच्चे तेल के लिए हर बैरल पर कीमत से $22 ज्यादा चुका रही भारतीय कंपनियां, जान लीजिए वजह
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में संकट गहराने के कारण कच्चे तेल की कीमत में हाल में काफी तेजी आई है। सोमवार को इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 108 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी। हालांकि इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि भारत की ऑयल रिफाइनरियों को फिजिकल क्रूड के लिए फ्यूचर्स कीमतों की तुलना में काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही हैं। इसकी वजह यह है कि खाड़ी देशों से सप्लाई सीमित बनी हुई है।

US एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के स्पॉट-प्राइस डेटा के मुताबिक 1 से 22 सितंबर के बीच ब्रेंट स्पॉट कीमतें नवंबर ब्रेंट फ्यूचर्स कीमतों से औसतन लगभग $12 प्रति बैरल ज्यादा रहीं। 15 सितंबर को यह अंतर बढ़कर $22 तक पहुंच गया था। EIA स्पॉट कीमत फिजिकल ब्रेंट मार्केट के लिए एक रेफरेंस प्रदान करती है, जहां क्रूड कार्गो की वास्तविक खरीद-बिक्री होती है।

क्यों गिर रही है कीमत?

ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री के अधिकारियों ने कहा कि फ्यूचर्स कीमतें फिजिकल मार्केट की मौजूदा स्थितियों को नहीं दर्शाती हैं। सप्लायर फ्यूचर्स कीमतों के ऊपर $20 प्रति बैरल तक का प्रीमियम मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिजिकल मार्केट टाइट है। इसका मुख्य कारण यह है कि खाड़ी देशों से सप्लाई सीमित है।

ब्रेंट फ्यूचर्स कीमत वह कीमत है जिस पर फ्यूचर्स मार्केट में डिलीवरी के लिए एक स्टैंडर्ड कॉन्ट्रैक्ट का ट्रेड होता है। फिजिकल मार्केट की ऊंची कीमतें रिफाइनर की खरीद लागत को बढ़ा देती हैं। क्रूड खरीद के सौदे आमतौर पर डिलीवरी से लगभग दो महीने पहले तय किए जाते हैं।

कैसे तय होता है रेट?

उदाहरण के लिए, सितंबर में खरीदा गया कार्गो अक्टूबर में लोड हो सकता है और नवंबर में रिफाइनरी पहुंच सकता है। इसकी कीमत अक्टूबर (लोडिंग महीने) के फिजिकल-मार्केट बेंचमार्क के औसत के आधार पर तय होगी। oilprice.com के मुताबिक भारतीय बास्केट की कीमत 5 दिन पहले 123.7 अरब डॉलर थी।
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