पीएम मोदी ने ये भी लिखा 'हमने भारत-इजरायल स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के अलग-अलग पहलुओं पर हुई प्रगति की समीक्षा की जो लगातार और मजबूत होती जा रही है।' मोदी ने यह मैसेज अंग्रेजी और हिब्रू में पोस्ट किया और नेतन्याहू ने इसे रीपोस्ट किया। इजरायल के जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट हर्ब कीनोन जो देश के प्रमुख अखबार जेरूशलम पोस्ट के एनालिस्ट हैं उन्होंने एक लेख में लिखा है कि 'मक्का समझौते के बाद एक बाद जो साफ नजर आती है वो ये है कि भारत और इजरायल के संबंध और मजबूत होंगे।'
मक्का समझौते से एक दिन पहले मोदी-नेतन्याहू में बातचीत
हर्ब कीनोन ने लिखा है कि पीएम मोदी और नेतन्याहू में अचानक टेलीफोन पर क्यों बात हुई होगी वो अगले दिन समझ में आ गई जब शुक्रवार को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने आपसी रक्षा के लिए एक बड़ा समझौता किया। इसे 'मक्का पैक्ट' कहा गया क्योंकि इसे मक्का शहर में ही अंतिम रूप दिया गया था। इसीलिए यह सोचना मुश्किल है कि नेतन्याहू और मोदी की बातचीत में इस समझौते पर चर्चा नहीं हुई होगी। भले ही जनता ने शुक्रवार को ही इस समझौते पर हस्ताक्षर होते देखे लेकिन यरूशलेम और नई दिल्ली को निश्चित रूप से पता रहा होगा कि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा हैहर्ब कीनोन ने अपने लेख में लिखा है कि वर्षों से वाशिंगटन ने अमेरिका के नेतृत्व वाले क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे का विजन आगे बढ़ाया जिसमें इजरायल को सऊदी अरब और अन्य व्यावहारिक अरब देशों के साथ जोड़ने की बात थी। लेकिन मक्का में ऐसा नहीं हुआ और मोदी और नेतन्याहू निश्चित रूप से एक बहुत ही अलग त्रिपक्षीय गठबंधन के नतीजों पर चर्चा कर रहे थे। मोदी ने जिस एक बड़े नतीजे का जिक्र किया वह था 'भारत-इजरायल विशेष रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर प्रगति।'
उन्होंने लिखा है कि 'मक्का में हुई घोषणा निश्चित रूप से उस साझेदारी को पूरी गति से आगे बढ़ाने में मदद करेगी। दुनिया ऐसे ही काम करती है। कार्यों से प्रतिक्रियाएं होती हैं जो बदले में नई व्यवस्थाओं को जन्म देती हैं।'
उन्होंने लिखा है कि 'मक्का में हुई घोषणा निश्चित रूप से उस साझेदारी को पूरी गति से आगे बढ़ाने में मदद करेगी। दुनिया ऐसे ही काम करती है। कार्यों से प्रतिक्रियाएं होती हैं जो बदले में नई व्यवस्थाओं को जन्म देती हैं।'
