अधोसंरचना विकास के नाम पर 10 वर्षों में काट दिए तीन लाख पेड़, 30 फीसदी तक घटा हरित क्षेत्र

अधोसंरचना विकास के नाम पर 10 वर्षों में काट दिए तीन लाख पेड़, 30 फीसदी तक घटा हरित क्षेत्र
भोपाल। राजधानी में अधोसंरचना विकास के नाम पर बीते सात वर्षों में तीन लाख से अधिक पेड़ काट दिए गए। जिससे शहर में 30 प्रतिशत से अधिक हरित क्षेत्र कम हो गया है। इधर पेड़ों के कम होने से सड़कों में धूल और जलाशयों में प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है। इसका बुरा असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है, लेकिन शहर में विकास के लिए जिम्मेदार एजेंसियों के अधिकारी हरियाली को संरक्षण देने की बजाय इसे बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं।
पर्यावरणविद सुभाष सी पांडे ने बताया कि हाल ही में किए एक सर्वे में सामने आया है कि बीते 10 सालों में निर्माण कार्यों को लेकर जिस प्रकार पेड़ काटे गए हैं, उससे भोपाल की हरियाली में 30 फीसदी की कमी आई है। चौकानें वाली बात है कि बीते पांच वर्षों में इसमें 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। व्यापक स्तर पर पेड़ों की कटाई वाले नौ स्थानों पर 225 एकड़ हरित क्षेत्र के सफाए के बाद वहां कांक्रीट के जंगल बना दिए गए। इससे गर्मियों के दिनों में शहर में भीषण गर्मी पड़ती है। क्योंकि इसी वजह से यहां औसत तापमान पांच से सात डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। शहर के पर्यावरण को सर्वाधिक नुकसान वर्ष 2014 से 2021 के बीच हुआ है। इसी समय लगभग 80 फीसदी पेड़ काटे गए। जबकि 20 फीसद पेड़ों की कटाई 2009 से 2013 के बीच हुई है।

50 साल पुराने डेढ़ लाख पेड़ काटे

प्रो. राजचंद्रन की वर्ष 2016 की रिपोर्ट में प्रकाशित शोध, गूगल इमेजनरी और अन्य सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से कम हो रहे ग्रीन बेल्ट को समझ सकते हैं। इसके लिए शहर को 15 प्रमुख क्षेत्रों में बांटा गया और तीन सड़कों (बीआरटीएस होशंगाबाद रोड, कलियासोत डेम की ओर जाने वाली रोड एवं नार्थ टीटी नगर की स्मार्ट रोड) को सैंपल के रूप में लिया गया। इन सड़कों के पास मौजूद प्रमुख 11 इलाकों के 345 एकड़ क्षेत्र का विश्लेषण करने पर पता चला कि 10 वर्ष में यहां की हरियाली पूरी तरह से समाप्त कर दी गई है। सिर्फ 11 क्षेत्र में ही 50 साल पुराने 1.55 लाख से अधिक पेड़ काटे गए।

पेड़ो का विस्थापन भी सफल नहीं हुआ

विकास के नाम पर पेड़ों की बलि दी जा रही है। हालांकि, इन पेड़ों को विस्थापित कर कलियासोत, केरवा व चंदनपुरा आदि जंगलों में लगाने के दावे किए गए, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से इसमें भी सफलता नहीं मिली। इन पेड़ों ने कुछ ही दिनों में दम तोड़ दिया। जबकि अधिकारी पेड़ों के बदले चार गुना तक पौधे लगाने के दावा करते रहे हैं, लेकिन जब ये बड़े होकर पेड़ बनेंगे तब तक तो पर्यावरण का काफी नुकसान हो चुका होगा। शहर की हरियाली धीरे-धीरे उजड़ जाएगी।

इन परियोजनाओं की बलि चढ़े पेड़

स्मार्ट सिटी के निर्माण में - 6000

बीआरटीएस कारिडोर बनाने - 3000

विधायक आवास बनाने - 1150

सिंगारचोली सड़क निर्माण और चौड़ीकरण - 1800

हबीबगंज स्टेशन निर्माण - 150

खटलापुरा से एमवीएम कालेज तक सड़क चौड़ीकरण - 200

मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए - 3000

कोलार सिक्सलेन - 800
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