चेन्नई की इस कंपनी का शेयर फरवरी 2012 में 10,000 रुपये पर पहुंचा था और उसके बाद इसमें 900 परसेंट तेजी आ चुकी है। इसे 90,000 रुपये से एक लाख रुपये तक पहुंचने में दो साल से ज्यादा समय लगा है। यह पहली बार 20 जनवरी, 2021 को 90,000 रुपये पर पहुंचा था। एमआरएफ अपने इन्वेस्टर्स को डिविडेंड दिया है लेकिन कभी भी बोनस शेयर जारी नहीं किया है। इसके अलावा कंपनी ने कभी भी स्टॉक स्पिलिट नहीं किया है। अमूमन शेयर की कीमत बढ़ने पर कंपनियां छोटे निवेशकों को फायदा देने के लिए शेयर स्पिलिट करती हैं। लेकिन एमआरएफ ने कभी ऐसा नहीं किया।
अमेरिका को एक्सपोर्ट
कंपनी का शेयर अभी 55 गुना पीई (प्राइस टु अर्निंग) पर ट्रेड कर रहा है जबकि इसका प्राइस टु बुक वैल्यू 2.89 गुना है। इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (RoC) 5.35 परसेंट और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (RoCE) 7.94 परसेंट है। 31 मार्च 2023 के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी में प्रमोटर्स की 27.8 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि 72.16 फीसदी हिस्सेदारी पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास है। इनमें एफआईआई के पास 18.05 परसेंट और डीआईआई के पास 11.66 फीसदी हिस्सेदारी है। मार्च तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 86 परसेंट उछाल के साथ 313.5 करोड़ रुपये रहा।
एमआरएफ ने प्रति शेयर 169 रुपये का डिविडेंड दिया था। मार्च तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 10 फीसदी तेजी के साथ 5,842 करोड़ रुपये रहा। जानकारों का कहना है कि इस स्टॉक में अभी काफी दम बचा है। नियर टर्म में यह 1.15 हजार रुपये और दिवाली तक 1.25 लाख रुपये तक जा सकता है। ट्रेंडलाइन के डेटा के मुताबिक नौ एनालिस्ट्स में इस शेयर को बेचने की सलाह दी है। एमआरएफ 1967 में अमेरिका को टायर एक्सपोर्ट करने वाली भारत की पहली कंपनी बनी थी। टायर का आविष्कार अमेरिका में ही हुआ था। 1984 में देश की पहली मॉडर्न कार मारुति सुजुकी 800 पर भी एमआरएफ के टायर लगे थे।











