इससे पहले पिछले हफ्ते कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई थी जो मार्च के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट थी। पिछले हफ्ते ब्रेंट में 11 परसेंट और डब्ल्यूटीआई में आठ परसेंट गिरावट आई थी। हाई इंटरेस्ट रेट्स और ग्लोबल डिमांड पर इसके असर को देखते हुए कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई थी। लेकिन हमास ने इस पर पानी फेर दिया है। हमास ने शनिवार को इजरायली शहरों पर हमला करके सैकड़ों लोगों का मार डाला। इसके जवाब में इजरायल ने भी गाजा में कार्रवाई की है। इस लड़ाई का असर ईरान और सऊदी अरब पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है।
पुरी ने क्या कहा
इस बीच पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि तेल की कीमत में बढ़ोतरी भारत के लिए चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर तेल की कीमत इस लिमिट से ऊपर पहुंचती है तो इससे महंगाई बढ़ेगी और एक बार फिर 2008 जैसी स्थिति पैदा होगी। ग्लोबल रिकवरी के लिए तेल की कीमतें काफी अहम हैं। 2008 में लीमन ब्रदर्स संकट के कारण तेल की कीमत रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। पिछले साल रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण मार्च में कच्चे तेल की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी।भारत में पिछले साल मई से पेट्रोल और डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं आया है। उम्मीद की जा रही थी कि चुनावी मौसम में पेट्रोल-डीजल की कीमत में गिरावट आ सकती है। लेकिन फिलहाल इसकी संभावनी नहीं दिख रही है। दिल्ली में अभी पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये और डीजल की कीमत 89.62 रुपये प्रति लीटर चल रही है। इस बीच मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस (Moody's Investors Service) ने एक रिपोर्ट में कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं होगा। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हुआ है।











