अधिकारी ने कहा कि कुछ खास सामान के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार आर्थिक मदद दे सकती है जबकि कुछ पर आयात शुल्क बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने करीब 100 ऐसे सामानों की लिस्ट बनाई है जिन पर इंसेंटिव दिया जा सकता है। इनमें इंजीनियरिंग सामान, स्टील के उत्पाद, मशीनें और रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें जैसे सूटकेस और फ्लोरिंग मटीरियल्स शामिल है। अभी इन चीजों के आयात पर 7.5 फीसदी से 10 फीसदी तक ड्यूटी लगती है।
सरकार की चिंता
अप्रैल से नवंबर 2026 के बीच, भारत ने 292 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया जबकि 515.2 अरब डॉलर का सामान आयात किया। देश के बढ़ते व्यापार घाटे ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। उद्योग जगत को भी यह सलाह दी गई है कि वे अपनी सप्लाई चेन में किसी एक देश पर निर्भर न रहें और स्थानीय स्तर पर भी उत्पादन बढ़ाएं। एक अधिकारी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर बने कुछ सामान की क्वालिटी उतनी अच्छी नहीं है और उनकी कीमत भी ज्यादा है, जिस वजह से वे आयातित सामानों से मुकाबला नहीं कर पाते।भारत में चीन कई सामान का सबसे बड़ा सप्लायर है। उदाहरण के लिए, 2025 में भारत ने 20.85 मिलियन डॉलर के छाते आयात किए, जिनमें से 17.7 मिलियन डॉलर के छाते चीन से आए। इसी तरह, 2024-25 में चश्मों और गॉगल्स का आयात लगभग 114 मिलियन डॉलर का हुआ, जिसमें से करीब आधा चीन से आया। हांगकांग के रास्ते भी काफी सामान आता है। इटली तीसरे नंबर पर है। खेती-बाड़ी में काम आने वाले कुछ मशीनों के मामले में तो चीन से आयात 90% है।











