छात्रसंघ चुनाव के मॉडल पर फंसा पेंच, उच्च शिक्षा विभाग ने शासन को सौंपे प्रस्ताव, अंतिम मुहर लगाएंगे CM मोहन यादव

छात्रसंघ चुनाव के मॉडल पर फंसा पेंच, उच्च शिक्षा विभाग ने शासन को सौंपे प्रस्ताव, अंतिम मुहर लगाएंगे CM मोहन यादव

भोपाल। प्रदेश के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव सितंबर में कराए जाने हैं, लेकिन चुनाव की तारीख नजदीक आने के बावजूद सरकार अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि चुनाव किस प्रणाली के तहत होंगे। उच्च शिक्षा विभाग ने चुनाव कराने को लेकर अपने प्रस्ताव शासन को सौंप दिए हैं।

अब चुनाव प्रणाली पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव करेंगे। उच्च शिक्षा विभाग के वार्षिक कैलेंडर में सितंबर में छात्रसंघ चुनाव कराने का उल्लेख है। इसी आधार पर जबलपुर हाईकोर्ट ने भी सरकार को सितंबर में चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर चुनाव की संभावित व्यवस्थाओं और मॉडल पर चर्चा की।

एनएसयूआई ने दी चेतावनी

चुनाव प्रणाली के परीक्षण के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने प्रस्ताव शासन को भेज दिए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे या अप्रत्यक्ष प्रणाली से। सरकार के स्तर पर अंतिम निर्णय नहीं होने से छात्र संगठनों में भी बेचैनी बढ़ रही है। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया तो संगठन एक बार फिर हाईकोर्ट का रुख करेगा।

साल 2017 के बाद से नहीं हुए छात्रसंघ चुनाव प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। अलग-अलग समय पर सरकार की ओर से विभिन्न कारणों का हवाला देकर चुनाव टाले जाते रहे हैं। ऐसे में इस बार सितंबर में चुनाव कराने के वार्षिक कैलेंडर में उल्लेख और हाईकोर्ट के निर्देश के बाद छात्र संगठनों को चुनाव की उम्मीद बंधी है।

एबीवीपी भी कई बार कर चुका है मांग

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) भी मुख्यमंत्री मोहन यादव को कई बार पत्र लिखकर छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग कर चुका है। परिषद ने प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने की मांग की है। उनका तर्क है कि इससे विद्यार्थी सीधे अपने प्रतिनिधि का चुनाव कर सकेंगे।

वर्तमान में एबीवीपी की ओर से कॉलेजों की अव्यवस्थाओं को लेकर सभी जिलों में विद्यार्थी हुंकार अभियान चलाया जा रहा है। इसमें भी छात्रसंघ चुनाव को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद विभाग की ओर से समिति गठित कर परीक्षण कराया गया है।


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