लॉ फर्म Economic Laws Practice में पार्टनर और इंटरनेशनल ट्रेड एंड कस्टम्स प्रैक्टिस के को-हेड संजय नोतानी ने कहा कि उन्हें कंपनियों की तरफ से सवाल आने शुरू हो गए हैं। वे फोर्स मेज्योर क्लॉज को यूज करना चाहती हैं और साथ ही कॉन्ट्रैक्ट पर नए सिरे से बातचीत करना चाहती हैं। कुछ कंपनियों ने तो अपनी सप्लाई चेन पर नए सिरे से विचार करना शुरू कर दिया है। वेयरहाउसेज और बंदरगाहों पर अटके सामान पर ज्यादा फीस लगने का खतरा है। शिपिंग और एयर ट्रैफिक में समस्या के कारण निर्यातकों और आयातकों की दिक्कत बढ़ गई है।
सबसे बड़ा ट्रेडिंग ब्लॉक
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग ब्लॉक है। 2024-25 में दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $178.56 अरब का रहा था जो भारत के ग्लोबल ट्रेड का 15.42% है। भारत से इन देशों को इंजीनियरिंग गुड्स, चावल, टेक्सटाइल्स, मशीनरी, जेम्स एंड जूलरी का एक्सपोर्ट होता है जबकि भारत इन देशों से कच्चा तेल, एलएनजी, पेट्रोकेमिकल्स और सोने जैसी बहुमूल्य धातुएं मंगाता है।लॉ फर्म डीएसके लीगल में मैनेजिंग पार्टनर आनंद देसाई ने कहा, जीसीसी देशों को आयात और निर्यात में काफी अनिश्चितता दिख रही है। अधिकांश मामले में फोर्स मेज्योर में समाधान है लेकिन अभी यह तय नहीं है कि मामला कब तक शांत होगा। इस कारण कई कॉन्ट्रैक्ट अटक सकते हैं या खत्म हो सकते हैं। फर्म ने हाल में दुबई और अबु धाबी में ऑफिस खोले हैं। जानकारों का कहना है कि इस स्थिति के कारण कॉन्ट्रैक्ट में गंभीर बाधाएं पैदा हो सकती हैं।











