देश में अभी करीब 25 वंदे भारत चल रही हैं। लेकिन किराया महंगा होने के कारण यह आम लोगों की पहुंच से बाहर है। यही वजह है कि सरकार अब आम लोगों के लिए वंदे साधारण चलाने की तैयारी कर रही है। वंदे भारत और वंदे साधारण में वही अंतर है जो शताब्दी और जन शताब्दी में है। 1988 में जब शताब्दी एक्सप्रेस को जब शुरू किया गया था तो इसे अमीरों की ट्रेन कहा गया। इसकी वजह यह थी कि इसका किराया आम ट्रेनों के मुकाबले ज्यादा था। इसके करीब एक दशक बाद आम लोगों के लिए जन शताब्दी शुरू की कई थी।
कितना होगा किराया
लेकिन वंदे भारत के साथ ऐसा नहीं है। आम लोगों को जल्दी ही वंदे साधारण में वही सुविधाएं मिल सकती हैं। देश में पहली वंदे भारत साल 2019 में नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चली थी। पिछले साल इसके एडवांस वर्जन को पिछले साल लॉन्च किया गया था। अब इसके सस्ते वर्जन को लाने की तैयारी है। देश में अगले साल आम चुनाव होने हैं और उससे पहले देश को वंदे साधारण का तोहफा मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक ICF में इस पर काम शुरू हो चुका है। अगले कुछ महीने में इसे तैयार कर लिया जाएगा।माना जा रहा है कि वंदे साधारण एक्सप्रेस में वंदे भारत जैसी ही सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही इसकी रफ्तार भी वंदे भारत के बराबर होगी। इसमें सभी सेंकेंड क्लास के डिब्बे होंगे। इसका किराया भी काफी कम होगा। वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया शताब्दी एक्सप्रेस से करीब 18 फीसदी ज्यादा है। उदाहरण के लिए दिल्ली से देहरादून के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस का चेयर कार किराया 1,065 रुपये है जबकि शताब्दी एक्सप्रेस का किराया 905 रुपये है। इसी तरह दिल्ली से देहरादून के बीच जन शताब्दी एक्सप्रेस में सेकंड क्लास का किराया 165 रुपये है। इस हिसाब से देखें तो वंदे साधारण का किराया 190 रुपये तक हो सकता है।











