मालवा प्रांत का घोष प्रकट उत्सव

मालवा प्रांत का घोष प्रकट उत्सव
महू। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मालवा प्रांत द्वारा आयोजित घोष प्रकट उत्सव का आयोजन दिनांक 11 मई सोमवार को महू के वेटरनरी कॉलेज खेल परिसर में शाम 5:30 संपन्न हुआ। घोष वर्ग विगत 1 मई से महू में आयोजित किया जा रहा हे। घोष वर्ग में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे स्वयंसेवकों द्वारा इस उत्सव में घेाष वादन का प्रदर्शन किया गया। उक्त कार्यक्रम में विशेष रूप से अतिथि  लेफ्टिनेंट जनरल जसविंदर सिंह संधू  (PVSM) उपस्थित रहे जिन्होंने अपने उद्बोधन में में भारतीय हु और देश का नागरिक हु पर अपना उद्भेदन दिया और बताया की अनेकता में एकता यही हर भारतीय की विशेषता।  वही घोष वर्ग के मुख्य वक्त मालवा प्रांत के प्रचारक राजमोहन सिंह जी द्वारा  बताया गया की संघ का घोष दल संगठन की जीवंत चेतना का प्रतीक है। प्रशिक्षक वर्ग में प्रशिक्षकों को बताया कि इसकी ध्वनि केवल वाद्य  नहीं है अभी तू राष्ट्र भक्ति समर्पण और संगठन शक्ति का सशक्त उदघोष है। जो प्रत्येक स्वयंसेवक के हृदय में नव ऊर्जा का संचार करता है। इसकी लय और ताल स्वयं सेवकों में अनुशासन समन्वय और एकात्मकता का भाव जागृत होता है। मुख्य वक्ता द्वारा पधारे सभी मालवा प्रांत के स्वयं सेवकों और मुख्यतः हजारों के संख्या में घोष वर्ग में उपस्थित सभी समाज जनो ,माताओं,बहनों से खास कर युवा वर्ग से पंच परिवर्तन के बारे में बताया।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दृष्टि में “पंच परिवर्तन” समाज जीवन में सकारात्मक और व्यापक बदलाव लाने का एक अभियान है। इसका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सुधार नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास को मजबूत करना है। संघ द्वारा बताए गए पंच परिवर्तन इस प्रकार हैं:
1. सामाजिक समरसता
जाति, ऊँच- नीच, भेदभाव और अस्पृश्यता को समाप्त करना।
सभी समाज वर्गों में समानता, भाईचारा और आत्मीयता बढ़ाना।
“हम सब एक हैं” की भावना को मजबूत करना।
2. कुटुंब प्रबोधन
परिवार संस्था को सशक्त बनाना।
परिवार में संस्कार, संवाद, सम्मान और भारतीय मूल्य बनाए रखना।
संयुक्त परिवार एवं पारिवारिक जिम्मेदारियों को बढ़ावा देना।
3. स्वदेशी का भाव
देश में बने उत्पादों, उद्योगों और स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन देना।
आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करना।
आर्थिक राष्ट्रवाद और भारतीय संसाधनों के उपयोग पर बल देना।
4. पर्यावरण संरक्षण
प्रकृति, जल, जंगल, जमीन और जीव-जंतुओं की रक्षा करना।
वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता को अपनाना।
पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली विकसित करना।
5. नागरिक कर्तव्य
संविधान, राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना।
मतदान, कर भुगतान, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी निभाना।
राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हित से ऊपर रखना।
संघ का मानना है कि यदि समाज इन पाँच क्षेत्रों में परिवर्तन लाता है, तो भारत सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय रूप से अधिक सशक्त बन सकता है। पूरब में पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक हमारे संत तुलसीदास, संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत रविदास, समर्थ रामदास जी, गुरु गोविंद सिंह जी,विवेकानंद जी, छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, संभाजी, बाजी राव जी, रानी लक्ष्मी बाई, रानी दुर्गावती, बाल गंगाधर तिलक, लाल लाजपतराय, वीर सावरकर, भगत सिंह सुखदेव, राजगुरु चन्द्र शेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, बलिराम हेडगेवार जैसे हमारे हजारों ऋषि मुनियों, क्रांति करियों, संतो महात्माओं और स्वयं सेवकों ने अखंड भारत को संजोने में अपने प्राणों तक की आहुति दी हे उसे व्यर्थ न जाने दे हम एक थे एक हे और एक रहेंगे जात पात ऊंच नीच का भेद मिटा कर आपस में हम भाई भाई का उदघोष कर आपस में मिलजुल कर रहेंगे और हमारे देश को पुनः सोने की चिड़िया बनाएंगे। सामाजिक समरसता के साथ सर्व प्रथम नैतिकता, सामाजिक समरसता, समान दृष्टिकोण, सकारात्मकता से सराबोर समाज का गठन करेंगे। आज 100 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। हम सभी अपने परिवार, समाज में उत्साह मनाए और अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर हो।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के दिन महाराष्ट्र के नागपुर में की गई थी। संस्थापक: डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार। उद्देश्य: हिंदू समाज को संगठित करना और राष्ट्र हित में कार्य करना। आयोजन में विशेष रूप से जिला संघचालक अनिल जी सोलंकी, के साथ हजारों की संख्या में स्वयं सेवक , अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता, महू क्षेत्रीय विधायक सु श्री ऊषा ठाकुर, बीजेपी के इंदौर जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा संग इंदौर, राऊ, महू, पीथमपुर , बेटमा, देपालपुर, सांवेर,मानपुर व ग्रामीण क्षेत्रों से अनेकों स्वयं सेवक, माताएं बहने और आम नागरिक उपस्थित हुए।
Advertisement