अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सुप्रीम लीडर के चुनाव में दखल की बात कही थी। वहीं इजरायल ने ना सिर्फ नए लीडर बल्कि इसे चुनने वाली काउंसिल तक पर हमले की धमकी दी थी। इसके बावजूद देश की सभी पॉलिटिकल और सिक्योरिटी बॉडी ने उनके चयन पर पूरा सपोर्ट जताया है। सुरक्षा एजेंसियों ने नए सुप्रीम लीडर के लिए सबकुछ करने की बात कही है।
ईरान ने दिया एकता संदेश
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, मोजतबा के पीछे खड़ा होना ईरान की तरफ से अमेरिका और इजरायल को एकता का मैसेज है। ईरान ने यह बताने की कोशिश की है कि अली खामेनेई और दूसरे शीर्ष नेताओं की हत्या के बावजूद तेहरान में सत्ता को गिराना विदेशी ताकतों के लिए कोई आसान काम नहीं होगा।ईरानी जनता को अब अपने नए सुप्रीम लीडर को देखना और सुनना चाहती है। मोजतबा खामेनेई बहुत ज्यादा पब्लिक के बीच नहीं रहे हैं। ऐसे में उनके देश के नाम संबोधन का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि एक्सपर्ट को लगता है कि फिलहाल सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए मोजतबा का जनता के सामने आना मुश्किल है।हार्डलाइनर माने जाते हैं मोजतबा
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को धार्मिक तौर पर अपने पिता अली खामेनेई के मुकाबले ज्यादा सख्त माना जाता है। सुप्रीम लीडर के तौर पर उनको IRGC की पसंद बताया गया है। मोजतबा खामेनेई 56 साल के हैं लेकिन अभी तक वह पब्लिक से ज्यादातर दूर ही रहे हैं। वह अपने पिता के आसपास ही रहते थे।मोजतबा खामेनेई पर मौलवियों का भरोसा रहा है। इसका फायदा उनको सुप्रीम लीडर बनने में मिला है। वह इराक-ईरान युद्ध के दौरान मिलिट्री में काम कर चुके हैं। मोजतबा की पत्नी जहरा भी 28 फरवरी को तेहरान में हुए हमले में अपने ससुर अली खामनेई और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ मारी गई हैं।











