अगर भारत से आने वाले सामान पर इतना ज्यादा टैक्स लगेगा, तो विदेशों में भारतीय सामान महंगा हो जाएगा। इससे दूसरे देशों के मुकाबले भारतीय सामान की बिक्री कम हो सकती है। खासकर कपड़ा, दवा, इंजीनियरिंग का सामान और खेती से जुड़े उत्पादों पर इसका असर पड़ सकता है। इन चीजों को बनाने वाली कंपनियों को या तो अपना मुनाफा कम करना होगा या फिर ग्राहकों को खोना पड़ेगा।
एनआरआई ने शेयर की अपनी चिंताएं
रेडिट पर एक एनआरआई यूजर ने लिखा, 'मैंने कहीं पढ़ा था कि पटेल ब्रदर्स और दूसरी बड़ी दुकानें दाल, अनाज वगैरह दूसरे दक्षिण एशियाई देशों से मंगाने की सोच रही हैं, ताकि टैक्स का असर कम हो। क्या आपके शहर में किराने की दुकानों पर इसका कोई असर दिख रहा है?' इस पोस्ट पर कई लोगों ने अपनी राय दी।एक यूजर ने कहा, 'मुझे ज्यादा पैसे देने होंगे। मैं बांग्लादेश से सांभर या किसी और देश से दाल मखनी नहीं खरीदूंगा। भारत से आने वाले सामान की क्वालिटी में बहुत फर्क होता है। खासकर मैं एक शाकाहारी हूं। इसलिए मैं गैर-भारतीय उत्पादों पर भरोसा नहीं करूंगा कि वे मेरे परिवार के लिए सात्विक हैं या नहीं। लेकिन, यह सिर्फ मेरी राय है।' इसका मतलब है कि कुछ लोग भारतीय सामान की क्वालिटी को लेकर समझौता नहीं करना चाहते, भले ही उन्हें ज्यादा पैसे देने पड़ें।
एक और यूजर ने कहा, 'ज्यादातर भारतीय किराने की दुकानों का मुनाफा बहुत ज्यादा होता है, इसलिए वे शुरुआत में टैक्स का बोझ खुद उठा लेंगे। लेकिन, अगर महीनों तक कोई व्यापार समझौता नहीं हुआ तो यह एक समस्या होगी।' यानी अमेरिका में दुकानदार कुछ समय तक तो कीमतें नहीं बढ़ाएंगे, लेकिन अगर टैक्स लंबे समय तक लगा रहा, तो उन्हें कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं।











