विदेशी निवेशकों ने की जमकर बिकवाली, लेकिन देसी निवेशकों ने संभाल लिया शेयर बाजार
भारतीय शेयर बाजार 2025 में कैसा रहा, इसे समझने के लिए सेंसेक्स और निफ्टी के आंकड़ों के बाहर भी देखना पड़ेगा। इस साल निवेशकों का व्यवहार विभिन्न वर्गों में साफ तौर पर बंटा रहा। विदेशी संस्थागत निवेश (Flls) लगातार बिकवाली करते रहे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने जमकर खरीदारी की।
रेलवे में नुकसान
2025 में रेलवे से जुड़े शेयरों की वैल्यू लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये घटी। साल 2024 में IRFC रिटेल इन्वेस्टर्स का चहेता था, लेकिन 2025 में यह 17% नीचे गया। इसी तरह से एनर्जी सेक्टर के शेयर भी नीचे आए। Suzion में 16% और रिलायंस पावर में 14% की गिरावट आई।
गोल्ड की चांदी
2025 ने निवेशकों का व्यवहार बदल दिया। स्मॉल कैप स्टॉक्स के बारे में अभी तक माना जाता था कि इसमें तो मुनाफा होना ही है, रिस्क बहुत कम है। लेकिन, उसका यह रुतबा छिन चुका है। जिन स्टॉक्स में बड़े करेक्शन देखने को मिले, उनमें से ज्यादातर स्मॉल और माइक्रो कैप हैं। तो निवेशकों ने यह सीखा कि मार्केट में धारणाओं के आधार पर नहीं उतरते। फिर, इस समय सिल्वर और गोल्ड के दाम में आश्चर्यजनक तेजी देखने को मिल रही है। इस वजह से लोग धड़ाधड़ पैसा लगा रहे हैं इन दोनों में अधिकतर निवेशक यही मान रहे हैं कि इससे भविष्य में मुनाफा होना तय है।
सबसे बड़ी जीत
अतीत की तुलना में इस बार रिटेल इन्वेस्टर्स ने जबरदस्त धैर्य और साहस दिखाया। साल के शुरुआती तीन महीने अस्थिरता वाले थे। कई स्टॉक में 30 से 50% की गिरावट आई, लेकिन वे इन शेयरों में बने रहे। SIP से आंकड़े बता रहे है कि लंबी अवधि के निवेश का ट्रेंड बढ़ रहा है। 2025 का संदेश यही रहा कि भारतीय बाजार को दौड़ने के लिए अब विदेशी पूंजी की जरूरत नहीं है।











