फुटबॉलर कशमिना क्रोएशिया के क्लब डायनेमो जागरेब टीम में शामिल

फुटबॉलर कशमिना क्रोएशिया के क्लब डायनेमो जागरेब टीम में शामिल

मणिपुर की एमके कशमिना को क्रोएशिया के टॉप डिविजन फुटबॉल क्लब डायनेमो जागरेब ने टीम में शामिल किया। डायनेमो क्लब की पुरुष टीम से लुका मोड्रिच, मातेओ कोवाकिच जैसे खिलाड़ी ट्रेनिंग ले चुके हैं।

कशमिना ने इस टीम के साथ जुड़कर अदिति चौहान, मनीषा कल्याण और ज्योति चौहान जैसी चुनिंदा महिला भारतीय खिलाड़ियों की सूची में जगह बनाई है, जो यूरोप में जाकर खेलेंगी। कशमिना के साथ किरण पिसदा को भी डायनेमो ने अपनी टीम का हिस्सा बनाया है।

इंजरी की वजह से पिछला सीजन खराब रहा और फिर मणिपुर दंगों में फंसी
2017 में कशमिना ने ईस्टर्न स्पोर्टिंग यूनियन की सीनियर टीम के साथ इंडियन वीमेंस लीग का खिताब जीता। इसके बाद उन्होंने गोकुलम केरल के साथ दो बार ये खिताब और जीता। हालांकि, 2023 की शुरुआत में कशमिना को एड़ी की इंजरी हुई। चोट की वजह से वे छह महीने खेल नहीं पाईं। इसके बाद मणिपुर हिंसा की वजह से फुटबॉल से दूर रहीं। वो बताती हैं, "मणिपुर में जो भी हुआ, उसने हम सबको परेशान किया। हमारे आसपास के सभी लोग जीविका के लिए सब्जी बेचने लगे थे।' इस दौरान कशमिना ने पिता के साथ ट्रेनिंग की। वो सुबह सबके जागने से पहले ट्रेनिंग शुरू कर देती थी।

5 से 9 बजे तक पिता के साथ ट्रेनिंग करने के बाद वो स्थानीय कोच दिनकू के साथ ट्रेनिंग करती थी। दिनकू को ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन का कोचिंग लाइसेंस प्राप्त हैं। कशमिना बताती हैं कि आस-पास के लोग मजाक उड़ाते हुए बोलते थे कि कशमिना पागल हो गई है।

कशमिना के पिता भी स्टेट लेवल के फुटबॉल खिलाड़ी
कशमिना के पिता स्टेट लेवल के फुटबॉल खिलाड़ी थे। हालांकि, घर चलाने के लिए उन्हें ऑटो रिक्शा चलाना पड़ा। दंगों के दौरान परिवार को तंगी का सामना करना पड़ा। तब मां ने स्थानीय टूर्नामेंट में पकौड़े बेचकर घर चलाया था।

कशमिना बताती हैं कि कुछ दिन बहुत ही मुश्किल होते थे। वो घर में अकेले बैठकर रोती थी। उनकी मदद दोस्त रोशनी ने भी की। रोशनी खुद एक जूडो प्लेयर हैं, जिन्हें खेलो इंडिया के तहत पैसे मिलते थे। वो उन्हीं पैसों से कशमिना की मदद करती थीं।


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