पिता करते हैं घोड़ों की देखभाल, बेटे ने राष्ट्रीय घुड़सवारी स्पर्धा में जीता पदक

पिता करते हैं घोड़ों की देखभाल, बेटे ने राष्ट्रीय घुड़सवारी स्पर्धा में जीता पदक
भोपाल। पिता मप्र राज्य घुड़सवारी अकादमी में घोड़ों की देखभाल करते हैं, वहीं उनके बेटे ने घुड़सवारी क सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में पदक जीत लिया है। शहर के 19 वर्षीय भोलू परमार ने यह कारनामा कर दिखाया है। उन्होंने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सीनियर इक्वेस्ट्रियन चैंपियनशिप ईवेंटिंग क्रास कंट्री सीसीएन-एक स्टार प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। फाइनल में अकादमी के भोलू परमार ने लुक घोड़े के साथ यह पदक अपने नाम किया। भोलू के पिता अकादमी में सईस के रूप में काम करते हैं, यानी वह अकादमी की घोड़ों की देखभाल करते हैं।

11 साल की उम्र में शुरू की थी घुड़सवारी

बचपन में समय-समय पर भोलू भी अपने पिता के साथ अकादमी में जाते थे। बस वहीं से उन्हें घुड़सवारी करने का जुनून सवार हो गया। भोलू मात्र 11 वर्ष की उम्र में पहली बार घोड़े पर बैठे थे। भोलू के पिता ओमकार सिंह ने बताया कि मैं अपने बेटे की उपलब्धि पर काफी खुश हूं। उम्मीद है कि भोलू देश के लिए और भी पदक जीते। भोलू के अलावा इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपूर्व दबाड़े ने जीता। जबकि सूबेदार राकेश कुमार को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। पहले स्थान पर रहे मेजर अपूर्व दबाडै हाल ही में संपन्न हुए 19वे एशियाड गेम्स चीन में भारतीय ईवेंटिंग टीम का प्रतिनिधित्व किया और तीसरे स्थान पर रहे। सूबेदार राकेश कुमार 18वीं एशियन गेम्स जकार्ता के रजत पदक विजेता है। जबकि भोलू परमार अभी जूनियर केटेगरी के खिलाड़ी हैं। सीनियर कैटेगरी में भी अपनी जगह बनाई और रजत पदक अपने नाम किया।

अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भी लहराया परचम

भोलू परमार ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में तीन स्वर्ण पदक जीते हैं। इस दौरान उन्होंने आयरलैंड और जयपुर में खेली गई अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में यह पदक जीते। वह उक्त प्रतियोगिता में जूनियर होने के बावजूद सीनियर स्तर पर खेले। इस दौरान लुक और हेरिकेन घोड़े पर सवारी की। जबकि नेशनल प्रतियोगिताओं में भोलू ने तीन स्वर्ण और चार रजत पदक जीते हैं।
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