इंदौर-जबलपुर के बाद भोपाल में फर्जी साइन मामला:ऑडिट विभाग के मुख्यालय में पेंशन केस में खुलासा, अफसरों ने दबाया

इंदौर-जबलपुर के बाद भोपाल में फर्जी साइन मामला:ऑडिट विभाग के मुख्यालय में पेंशन केस में खुलासा, अफसरों ने दबाया

फर्जी हस्ताक्षर से इंदौर में पहले डेढ़ सौ फिर 11 करोड़ और जबलपुर में 11 करोड़ के घोटाले के बाद अब भोपाल में भी ऐसा ही मामला सामने आया है। यहां ऑडिट विभाग के मुख्यालय में पेंशन प्रकरण के केस में अपर संचालक के फर्जी हस्ताक्षर करने का खुलासा हुआ है। अफसर इस मामले को दबाने में लगे हैं।

भोपाल के ऑडिट विभाग में पदस्थ अधीक्षक चंद्रकांत श्रीवास्तव 28 फरवरी को रिटायर्ड हुए। उनके पेंशन के दस्तावेजों पर अपर संचालक आरएस कटारा के फर्जी साइन किए गए हैं। मामला ट्रेजरी को भेज दिया गया था, लेकिन विभागीय आपत्ति के बाद पेंशन प्रकरण को रोक दिया गया है।

अधीक्षक पद से रिटायर्ड हुए चंद्रकांत श्रीवास्तव ने बताया कि मेरे दस्तावेजों पर किसने फर्जी साइन किए हैं, मुझे नहीं पता। इसकी जांच होना चाहिए। मैंने अपनी पूरी कार्रवाई नियमानुसार ही की है। मेरे केस में आपत्ति लिए जाने के बाद पेंशन प्रकरण रोक दिया गया है।

दो दिन पहले इंदौर में सामने आया 11 करोड़ के फर्जी बिलों का घोटाला

इंदौर नगर निगम में ड्रेनेज विभाग में फर्जी साइन से किए गए करोड़ों के घोटाले का एक और मामला सामने आया है। निगम के सहायक लेखापाल आशीष तायडे की शिकायत पर एमजी रोड पुलिस ने मेसर्स नींव कंस्ट्रक्शन के संचालक मोहम्मद साजिद के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।

169 फर्जी बिलों से 11 करोड़ की हेराफेरी

नगर निगम की जांच में सामने आया कि साजिद ने 185 बिल प्रस्तुत किए थे, जिनमें से 169 बिल फर्जी पाए गए। इन बिलों के माध्यम से फर्जी साइन कर 11 करोड़ रुपए से अधिक का गैरकानूनी भुगतान कराया गया। केवल 16 बिल वास्तविक निकले। जैसे ही यह घोटाला उजागर हुआ, निगम अधिकारियों ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया।

पहले से ब्लैकलिस्टेड थी कंपनी, फिर भी मिली ठेकेदारी

नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, मेसर्स नींव कंस्ट्रक्शन को इससे पहले भी अनियमितताओं के चलते ब्लैकलिस्ट किया गया था। इसके बावजूद, ठेकेदार ने कूटरचित दस्तावेजों के जरिए फिर से ठेके हासिल किए और घोटाले को अंजाम दिया।


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