हेलमेट न होता तो कट जाता गला; भोपाल में चलती बाइक पर फंदे की तरह लिपटा टूटा केबल, ड्राइवर की सूझबूझ से टला मौत का लाइव हादसा

हेलमेट न होता तो कट जाता गला; भोपाल में चलती बाइक पर फंदे की तरह लिपटा टूटा केबल, ड्राइवर की सूझबूझ से टला मौत का लाइव हादसा
भोपाल। राजधानी भोपाल के टीटी नगर इलाके में मंगलवार की रात एक ऐसा डरावना वाकया सामने आया, जिसे सुनकर किसी भी बाइक सवार के रोंगटे खड़े हो जाएं। रंगमहल चौराहे से रोशनपुरा की ओर जा रहे एक 30 वर्षीय युवक की जान जाते-जाते बची।चलती बाइक पर अचानक आसमान से टूटा एक ब्रॉडबैंड केबल किसी यमराज के फंदे की तरह सीधे युवक के गले में आकर लिपट गया। गनीमत यह रही कि युवक ने हेलमेट पहन रखा था और रफ्तार नियंत्रित थी, जिसके चलते एक बड़ा और जानलेवा हादसा होते-होते टल गया।
पीड़ित युवक ने इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को लेकर टीटी नगर पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

रंगमहल चौराहे के पास गले में आ फंसा 'मौत का फंदा'

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोटरा सुल्तानाबाद (कमला नगर) के रहने वाले रोहित सराठे (30) पेशे से ड्राइवर हैं। मंगलवार रात करीब 9:30 बजे वह अपनी बाइक से रंगमहल चौराहे से रोशनपुरा की ओर जा रहे थे। जैसे ही वह जीटीबी कॉम्प्लेक्स के सामने पहुंचे, हवा में बेहद खतरनाक तरीके से लटक रहा एक ढीला ब्रॉडबैंड केबल अचानक टूटकर नीचे गिरा और सीधा उनकी गर्दन में फंस गया।

खुद घायल हुए, पर दूसरों की जान बचाई

इस खौफनाक हादसे से उबरने के बाद रोहित ने जो किया, वह मिसाल है। खुद को केबल से मुक्त करने के बाद रोहित ने सड़क पर बिखरे उस लंबे और जानलेवा केबल को अकेले ही समेटा और फुटपाथ के किनारे किया। रोहित ने बताया कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि पीछे से आ रहे अन्य दोपहिया वाहन चालक उस अंधेरे में केबल की चपेट में आकर किसी बड़ी दुर्घटना का शिकार न हो जाएं।
इसके बाद वह सीधे थाने पहुंचे और लिखित शिकायत देकर जिम्मेदार केबल नेटवर्क कंपनी पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

विकास कार्यों के बीच 'मौत के जाल' बने लटकते तार

शिकायतकर्ता रोहित ने शहर के अन्य इलाकों की जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि केवल टीटी नगर ही नहीं, बल्कि भोपाल के कई ऐसे वीआईपी इलाके जहां स्मार्ट सिटी या अन्य निर्माण कार्य चल रहे हैं, वहां इंटरनेट, डिस्क और बिजली के तार बेहद लापरवाही से लटके हुए हैं। जिम्मेदार प्राइवेट एजेंसियां और नगर निगम इनका कभी सुरक्षा ऑडिट नहीं करते, जो रोज आम जनता की जान से खिलवाड़ है।
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