मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में कोर्ट के अधिकार सीमित हैं। कोर्ट केंद्र और राज्यों को मौजूदा कानूनों में संशोधन करने का निर्देश नहीं दे सकता। पीठ ने यह भी चिंता जताई कि न्यूनतम मजदूरी को अनिवार्य करने से उल्टा असर हो सकता है। उन्हें डर था कि ट्रेड यूनियनें हर घर को मुकदमेबाजी में घसीट सकती हैं।
हर घर मुकदमेबाजी में होगा... डोमेस्टिक वर्कर्स पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा ऐसा? सर्विस देने वाली एजेंसियों पर भी टिप्पणी
नई दिल्ली: बड़े शहरों में ऐसी काफी एजेंसियां खड़ी हो गई हैं जो घरेलू काम के लिए वर्कर उपलब्ध कराती हैं। इनके एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में घरेलू कामगारों (डोमेस्टिक वर्कर्स) के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करने और उसे लागू करने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा बनाने की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में कोर्ट के अधिकार सीमित हैं। कोर्ट केंद्र और राज्यों को मौजूदा कानूनों में संशोधन करने का निर्देश नहीं दे सकता। पीठ ने यह भी चिंता जताई कि न्यूनतम मजदूरी को अनिवार्य करने से उल्टा असर हो सकता है। उन्हें डर था कि ट्रेड यूनियनें हर घर को मुकदमेबाजी में घसीट सकती हैं।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में कोर्ट के अधिकार सीमित हैं। कोर्ट केंद्र और राज्यों को मौजूदा कानूनों में संशोधन करने का निर्देश नहीं दे सकता। पीठ ने यह भी चिंता जताई कि न्यूनतम मजदूरी को अनिवार्य करने से उल्टा असर हो सकता है। उन्हें डर था कि ट्रेड यूनियनें हर घर को मुकदमेबाजी में घसीट सकती हैं।











