उन्होंने कहा कि ग्लोबल लेवल पर इकॉनमी में अनिश्चितता बेशक कम हुई है, मगर यह बनी हुई है। ऐसे में आगे किसी तरह के कदम उठाए जाएंगे, अभी कहना मुश्किल है। भविष्य की कार्रवाई के बारे में कोई ठोस बात कहना मुश्किल है। गौरतलब है कि सरकार ने RBI को यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य किया है कि रिटेल महंगाई दर चार फीसदी से नीचे रहे। मई में रिटेल महंगाई दर घटकर 4.25% पर आ गई।
रीपो रेट को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने के लिए मतदान करते हुए, MPC सदस्य और डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा ने कहा कि रेट्स में कोई बदलाव ना करने और इसे पहले के स्तर पर रखने के लिए उनके वोट को खिलाड़ी की ओर से मिडल स्टंप गार्ड लेने के रूप में देखा जाना चाहिए, जो बाउंसिंग पिंच पर खेलने की तैयारी में हैं। बेशक पॉलिसी रेट्स अपने उच्च स्तर पर पहुंच चुकी हैं मगर हमें सतर्क रहते हुए स्थिति का आकलन करना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर पॉलिसी को सख्त बनाने पर फैसले लिए जा सकें।
महंगाई की पिक्चर अभी बाकी है
रिजर्व बैंक ने साफ कर दिया है कि वह रेपो रेट को कम करके लोन सस्ता करने में जल्दबाजी नहीं करेगा। यानी अभी रेट कम नहीं होंगे। साथ ही उसने यह बात भी कही है कि डिमांड की यह तस्वीर रही तो रेट फिर बढ़ सकते हैं। इसका मतलब है कि अगर महंगाई कम हुई और ग्लोबल इकॉनमी में सुधार हुआ, तो वह रेट कम कर सकता है। लेकिन स्थिति बिगड़ी और महंगाई बढ़ी तो वह फिर से रेट बढ़ा सकता है। रेट में बदलाव को लेकर वह इंडस्ट्री के दबाव में नहीं आएगा। रिजर्व बैंक की राय है कि यह सोच लेना कि महंगाई बढ़ने का खतरा खत्म हो गया है, अभी ठीक नहीं। लड़ाई जारी है। अल नीनो का असर ज्यादा पड़ा, कम बारिश हुई, साथ में ग्लोबल इकॉनमी में सुस्ती बढ़ी तो देश में महंगाई बढ़ भी सकती है। साफ मतलब है कि रिटेल महंगाई के 4.25 फीसदी आने या थोक महंगाई दर के माइनस में आ जाने पर ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। जो माहौल है, उसमें महंगाई फिर से बढ़ जाए तो हैरत की बात नहीं है।











