हाईकमान से जताई चिंता
आम आदमी पार्टी की केंद्रीय लीडरशिप ने यूसीसी का समर्थन किया था। तो वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और गुजरात के पार्टी नेताओं ने इस मुद्दे पर अलग बयान दिए थे और अपनी चिंता भी व्यक्त की थी। इस सब के बीच आप के गुजरात विधानसभा में विधायक दल के नेता चैतर वसावा दिल्ली पहुंचे थे और पार्टी के संयाेजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। दिल्ली से लौटने के बाद चैतर वसावा ने आदिवासियों को यूसीसी से बाहर रखने जाने की मांग भी उठाई थी। अब इसके बाद चैतर वसावा ने नर्मदा जिले में आने वाली डेडियापाडा विधानसभा से यूसीसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
आम आदमी पार्टी की केंद्रीय लीडरशिप ने यूसीसी का समर्थन किया था। तो वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और गुजरात के पार्टी नेताओं ने इस मुद्दे पर अलग बयान दिए थे और अपनी चिंता भी व्यक्त की थी। इस सब के बीच आप के गुजरात विधानसभा में विधायक दल के नेता चैतर वसावा दिल्ली पहुंचे थे और पार्टी के संयाेजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। दिल्ली से लौटने के बाद चैतर वसावा ने आदिवासियों को यूसीसी से बाहर रखने जाने की मांग भी उठाई थी। अब इसके बाद चैतर वसावा ने नर्मदा जिले में आने वाली डेडियापाडा विधानसभा से यूसीसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
खत्म हो जाएंगे अधिकार
चैतर वसावा का कहना है कि यूसीसी से आदिवासियों को संविधान में मिले अधिकार खत्म हो जाएंगे। चैतर वसावा ने 13 जुलाई को बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के बीच यूसीसी से होने वाले नुकसान गिनाए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह आदिवासियों के हक और अधिकार को बचाने का मामला है। इसलिए वे अपील करते हैं कि सभी दलों के नेता इस मुद्दे पर साथ आएं। केंद्र सरकार के इतर गुजरात में राज्य सरकार पहले से ही इस मुद्दे पर काम कर रही है। सरकार ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का ऐलान किया था। इसके बाद एक समिति का भी गठन किया था। राज्य में आदिवासियों की आबादी काफी ज्यादा है। प्रदेश की 26 में 4 लोकसभा सीटें और 26 विधानसभा सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं।
चैतर वसावा का कहना है कि यूसीसी से आदिवासियों को संविधान में मिले अधिकार खत्म हो जाएंगे। चैतर वसावा ने 13 जुलाई को बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के बीच यूसीसी से होने वाले नुकसान गिनाए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह आदिवासियों के हक और अधिकार को बचाने का मामला है। इसलिए वे अपील करते हैं कि सभी दलों के नेता इस मुद्दे पर साथ आएं। केंद्र सरकार के इतर गुजरात में राज्य सरकार पहले से ही इस मुद्दे पर काम कर रही है। सरकार ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का ऐलान किया था। इसके बाद एक समिति का भी गठन किया था। राज्य में आदिवासियों की आबादी काफी ज्यादा है। प्रदेश की 26 में 4 लोकसभा सीटें और 26 विधानसभा सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं।
आम आदमी पार्टी ने यूसीसी को समर्थन देने का ऐलान किया था, लेकिन अब पार्टी का स्टैंड थोड़ा बदला दिख रहा है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि विस्तृत विचार विमर्श के बाद ही इसे लागू किया जाना चाहिए। ऐसे में पार्टी एक तरफ समर्थन दे रही है तो सही साथ सवाल भी खड़े कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी की नजर राज्य की चार लोकसभा सीटों पर है। जो आदिवासी बहुल हैं। अगर आदिवासियों के बीच यूसीसी का मुद्दा आकार लेता है तो आम आदमी पार्टी इन सीटों पर बीजेपी की मुश्किल बढ़ा सकती है। आप इस मुद्दे पर जहां आक्रामक है तो वहीं बीजेपी और कांग्रेस के नेता शांत हैं। आप नेता चैतर वसावा पूर्व में आदिवासियों के लिए भीलिस्तान बनाने की मांग कर चुके हैं। चैतर वसावा के रुख को देखते हुए लग रहा है कि आप यूसीसी के मुद्दे पर पीछे हटेगी।











