बेटी के घर मां न करे हस्तक्षेप
मुंबई निवासी समाज सेविका रेखा बालानी ने टूटते रिश्तों के लिए अधिकांशतः मां को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अगर शादी के बाद मां अपनी बेटी के परिवार में हस्तक्षेप न करें तो टूटन को कुछ कम किया जा सकता है, जबकि कोल्हापुर के रमेश तनवानी ने समाज के भीतर बढ़ते धर्मांतरण पर चिंता व्यक्त करते हुए रिश्तो को टूटने से बचने हेतु बहू को घर में लक्ष्मी का दर्जा देने पर जोर दिया । दीपानी ने केंद्र सरकार से सिंधी समाज को अल्पसंख्यक घोषित कर उसे मिलने वाली सुविधाएं प्रदान करने की मांग की । इसी तरह उन्होंने राजनीति में आरक्षण को भी वक्त की जरूरत बताई। महासचिव सुरेश जसवानी ने लुप्त होती सिंधी भाषा को लुप्त होने से बचने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों से मदद की गुहार लगाई और मांग की के केंद्र एवं प्रदेश सरकारों में जितने भी सिंधी शिक्षकों के पद रिक्त हैं उन पदों को भरने के लिए यह ऐलान किया जाए कि जो भी विद्यार्थी सिंधी भाषा में 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करेगा उसे सरकारी सिंधी टीचर की नियुक्ति प्रदान की जाएगी। सम्मेलन में यह भी संकल्प दिलाया गया कि हर सिंधी परिवार अपने घर में मातृभाषा में बच्चों से बात करेगा सम्मेलन में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग दो दर्जन प्रतिनिधियों में भाग लिया जिसमें राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नरेश चोटरानी, मुकेश ग्वालानी, भावना ग्वालानी, सुनील आसनानी ,गीता आसनानी ,महेश डेटाणी अशोक लेखवानी , अशोक मंझानी , रमेश टेकवानी योगेश नारायण दास परसराम फुलवानी, कमल देवनाथ, तुलसी तोलानी, दिलीप मूलचंदानी मुख्य रूप से शामिल है।
नरेश गिदवानी और उसकी टीम ने सिंधी गीतों की मचाई धूम
3 दिवसीय सम्मेलन में दो दिन रात 8 से लेकर 10 बजे तक सिंधी गीत संगीत का शानदार कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें भोपाल के जाने-माने सिंधी गायक नरेश गिदवानी और उसकी टीम ने सिंधी गीतों से समा बांधा।











