होर्मुज स्ट्रेट क्यों जरूरी है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम स्ट्रैटेजिक शिपिंग लेन में से एक है। दुनिया की तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इस पतले पानी के रास्ते से होकर गुजरता है। यूनाइटेड नेशंस कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (UNCTAD) के डेटा के आंकड़ों से इसकी अहमियत का पता लगता है। इनके मुताबिक, 2024 में हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल इस स्ट्रेट से होकर गुजरा। यह दुनिया भर में समुद्र से होने वाले तेल व्यापार का लगभग 25 फीसदी है। इसमें से कच्चा तेल और कंडेनसेट हर दिन 1.4 करोड़ बैरल था। वहीं, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स रोजाना लगभग 60 लाख बैरल था।हाल की बढ़ोतरी से पहले के समय के डेटा से भी इस रूट पर निर्भरता का लेवल पता चलता है। दुनिया भर में समुद्र से होने वाले क्रूड व्यापार का लगभग 38 फीसदी, लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस के व्यापार का 29 फीसदी, लिक्विफाइड नेचुरल गैस और रिफाइंड तेल प्रोडक्ट्स में से हर एक का 19 फीसदी इसी स्ट्रेट से गुजरा।
एशिया को एनर्जी सप्लाई का बड़ा रिस्क क्यों?
किसी भी लंबे समय तक रुकावट का असर एशिया में सबसे ज्यादा महसूस होने की आशंका है। यह होर्मुज स्ट्रेट के जरिए एनर्जी शिपमेंट पर बहुत ज्यादा निर्भर है। 2024 में स्ट्रेट के जरिए हर दिन ट्रांसपोर्ट किए जाने वाले 1.43 करोड़ बैरल कच्चे तेल का लगभग 84 फीसदी एशियाई मार्केट के लिए था। वहीं, सिर्फ 16 फीसदी यूरोप और दूसरे इलाकों में गया।इसी तरह रोजाना पानी के रास्ते भेजी जाने वाली 10.4 अरब क्यूबिक फीट लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का लगभग 83 फीसदी एशिया के लिए था।











