भोपाल। सामूहिक विवाह सम्मेलन की तर्ज पर सिंधी समाज इस वर्ष भी सामूहिक जनेऊ संस्कार सम्मेलन आयोजित कर रहा है। सम्मेलन में बच्चों को वैदिक रीति से जनेऊ का पवित्र धागा पहनाने के साथ ही सनातन संस्कृति का ज्ञान भी दिया जाएगा। सिंधी समाज के प्रमुख धार्मिक गुरू संत संजय मसंद की अगुआई में यह सम्मेलन होगा। संत संजय मसंद शनिवार सुबह वीरांवल एक्सप्रेस से संत हिरदाराम नगर पहुंचे। स्टेशन पर प्रकाश वीधानी के नेतृत्व में उनकी आत्मीय अगवानी की गई। आज शाम को संतजी के सम्मान में शोभायात्रा भी निकाली जाएगी।
सम्मेलन का आयोजन संत बाबा सुखरामदास मसंद सेवा ट्रस्ट एवं सुखझील दरबार समिति ने किया है। समिति के सचिव कमल वीधानी ने बताया कि जनेऊ संस्कार सम्मेलन 18 जून को ग्राम बेहटा स्थित स्वामी टेंऊराम आश्रम में होगा। अभी तक 51 बालकों के उपनयन संस्कार की सहमति मिली है। प्रमुख ज्योर्तिविद् पं. जय कुमार शर्मा वैदिक रीति से जनेऊ संस्कार की रस्म अदा कराएंगे। फिजूलखर्ची रोकने के उद्देश्य से ट्रस्ट ने यह पहल की है। आमतौर पर समाज के बड़े परिवार बालकों के जनेऊ संस्कार के लिए भव्य आयोजन करते हैं, इसमें बड़ी राशि खर्च होती है। सामूहिक आयोजन से समाज के गरीब एवं मध्यम वर्ग को बिना किसी खर्च के रस्म अदा करने की सुविधा मिलती है। इस दौरान उन्हें जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है।
संस्कारों का महत्व बताया जाएगा
जनेऊ या उपनयन संस्कार को हिंदू सनातन संस्कृति के 24 संस्कारों में से एक माना गया है। समाज की नई पीढ़ी को इसके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। पूज्य सिंधी पंचायत के महासचिव माधु चांदवानी का कहना है कि सिंधी समाज में विवाह से पहले जनेऊ संस्कार देने की व्यवस्था है। आमतौर पर लोग विवाह से कुछ समय पहले ही यह रस्म अदा करते हैं, लेकिन इससे नई पीढ़ी को इसके महत्व की जानकारी नहीं मिल पाती। संस्कार सम्मेलन में संत, महात्मा एवं विद्वतजन बच्चों को सनातन एवं संस्कारों के बारे में बताते हैं। इससे उनका ज्ञान बढ़ता है। साथ ही संस्कृति को मजबूत बनाने में मदद











