बाद में गैस सुरक्षा किट पहनकर पड़ताल की तो पता चला कि वहां 20 से 30 बोरी क्लोरीन के रखे हुए थे। नमी के कारण गैस उठी। पानी पड़ने से रासायनिक प्रतिक्रिया तेज हुई और गैस भड़क उठी। अग्निशमन अधिकारी सौरभ कुमार पटेल ने बताया कि घटना के समय क्षेत्र में बिजली गुल थी।
पहले बिजली चालू कर फैक्ट्री के एग्जास्ट फैन चलवाए गए, ताकि धुआं बाहर निकले। इसके बाद क्लोरीन के बैग बाहर निकालकर डिफ्यूज किए गए। पूरी प्रक्रिया में ढाई से तीन घंटे का समय लगा। खतरनाक हो सकता था हादसा विशेषज्ञों का कहना है कि क्लोरीन के ढेर पर पानी पड़ने से तेज रासायनिक प्रतिक्रिया होती है।
पानी और क्लोरीन मिलकर हाइड्रोक्लोरिक एसिड और हाइड्रोक्लोरस एसिड बनाते हैं। यह इतनी तेजी से होता है कि क्लोरीन गैस फैल जाती है। इससे फेफड़ों और आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है। अगर यह रिसाव किसी बंद जगह पर हो तो धमाका भी हो सकता है।
क्लोरीन फैक्ट्री में गैस रिसाव की सूचना पर थाने की टीम और अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति पर जल्द ही काबू पा लिया गया। आसपास रहवासी क्षेत्र नहीं है, फिर भी सभी को अलर्ट कर दिया था। किसी के स्वास्थ्य बिगड़ने की सूचना नहीं है।
चंद्रिका सिंह यादव, थाना प्रभारी पिपलानी, भोपाल











