चीन की ओर से भूटान के जिस क्षेत्र में निर्माण किया जा रहा है, वह इलाका अरुणाचल प्रदेश से सटी भूटान की पूर्वी सीमा से 50 किलोमीटर की दूरी पर है। चीन ने बीते दो साल में जकरलुंग घाटी में लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। सैटेलाइन तस्वीरों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि यहां अब चीन की 129 इमारतें हैं, जो रिहायशी इमारतें लगती हैं। अगस्त, 2021 में यहां इस तरह की इमारतें नहीं थीं। जाहिर है कि बीते कुछ समय में चीन ने तेजी से इन इमारतों को तैयार किया है।
चीन की चालबाजी, भूटान से वार्ता के साथ-साथ घुसपैठ भी जारी, सीमा के अंदर बनाया सैन्य अड्डा और गांव
बीजिंग: चीन और भूटान के बीच सीमा विवाद को लेकर लगातार बातचीत चल रही है। एक तरफ वार्ता जारी है तो दूसरी ओर चीन अवैध तरीके से भूटान में घुसपैठ भी कर रहा है। उत्तरी भूटान की जकारलुंग घाटी में चीन ने कई अवैध निर्माण खड़े कर दिए हैं। उसने सिर्फ चौकियां ही नहीं बनाई हैं बल्कि गांव भी बसा दिया है। दोनों देशों के अफसरों के बीच बॉर्डर लाइन तय करने को लेकर बैठकों के बीच कुछ सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। जिनसे साफ है कि चीन की निर्माण गतिविधियां अभी भी भूटान की सीमा में जारी हैं। इससे ये भी जाहिर होता है कि भूटान के पास चीन के प्रस्ताव को मान लेने के अलावा विकल्प नहीं है।
भूटान में चीनी घुसपैठ पर लिखते रहे डैमियन साइमन का कहना है कि बड़े स्तर पर ये निर्माण हो रहा है। ये सिर्फ कुछ चौकियां नहीं हैं, ये पूरी तरह से प्लान करके बनाई गई इमारते हैं। वो भूटान की जमीन का चीनीकरण करने में लगा है। ये भी उसकी रणनीति का अभिन्न हिस्सा है। विशेषज्ञों ने पड़ोसियों के साथ की गई संधियों और वादों का सम्मान करने की चीन के तरीके पर भी चिंता जताई है। चीन ने विवादित इलाकों में यथास्थिति में बदलाव न करने के लिए 1998 में भूटान के साथ औपचारिक समझौता किया था, लेकिन इसे तोड़ते हुए उसने जकरलुंग पर निर्माण किया है। ये भी तब हुआ है जब इसी साल अक्टूबर में भूटान के विदेश मंत्री टांडी दोरजी ने चीन की यात्रा की थी और बॉर्डर समस्या हल होने की उम्मीद जताई थी।











