बैठक के दौरान चीन ने नेपाल में पश्चिमी प्रभाव, खासकर अमेरिकी मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (MCC) और स्टेट पार्टरनशिप प्रोग्राम को लेकर चिंता जताई। काठमांडू रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने कहा कि अमेरिकी पहल बाहर से देखने में अच्छी लगती है, लेकिन इसका मकसद बुरा है। ये चीन के लिए केवल परेशानी पैदा करती है। इस दौरान वांग ने कह कि दूर के रिश्तेदार उतने अच्छे नहीं होते, जितने करीबी पड़ोसी।
खनाल ने उठाया लिपुलेख का मुद्दा
इस बैठक में खनाल ने भारत के साथ सीमा विवाद का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने वांग से कहा कि लिपुलेख का मुद्दा नेपाल और भारत के बीच चर्चा का विषय है लेकिन भारत और चीन के बीच बार-बार हुए समझौतों ने इस विवाद को जटिल बना दिया है। हालांकि, इस पर उन्हें चीन से कोई आश्वासन नहीं मिला। भारत और चीन ने इसी साल लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने पर सहमति जताई है, जिसे लेकर नेपाल ने आपत्ति दर्ज की थी। नेपाल ने इसे अपना क्षेत्र बताते हुए नई दिल्ली और बीजिंग को राजनयिक नोट भेजे थे। हालांकि, वांगचीनी कंपनियों के भ्रष्टाचार का मामला
बीजिंग की एक बड़ी चिंता इस बात को लेकर भी थी कि पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के मामले में एक चीनी कंपनी का नाम आ रहा है। इस एयरपोर्ट की चीन की फंडिंग से तैयार किया है। खनाल ने जवाब में कहा कि इस मामले में नेपाल के एक सक्षम अधिकारी ने अदालत में मामला दर्ज कराया है और इसका सरकार से कोई लेना देना नहीं है।बैठक के बारे में जानकारी रखने वाले एक नेपाली अधिकारी ने काठमांडू पोस्ट को बताया कि बीजिंग की चिंता मुख्य रूप से पोखरा एयरपोर्ट में एक चीनी कंपनी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले, चीनी कर्ज से बने एयरपोर्ट में कथित भ्रष्टाचार और नेपाल में चीन के खिलाफ संभावित अमेरिकी कदमों को लेकर थी।











