लेकिन ईरान की अर्द्ध सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी ने समझौते के 14 प्वाइंट जारी किए हैं जिसे देखने से लगता है कि अमेरिका युद्ध से हार गया है। हालांकि इस फ्रेमवर्क में सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रावधान है लेकिन कई मुश्किल सवाल हैं जिनके जवाब जानने सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इन मुद्दों पर सहमति नहीं बनी तो समझौते का मतलब ही नहीं रह जाएगा। जैसे ईरान का परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील, फ्रीज किए गए फ़ंड और लेबनान में लड़ाई का भविष्य इन सवालों पर बातचीत को आगे के लिए टाल दिए गये हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच समझौता, कई सवाल
अमेरिका के एक अधिकारी ने CNN को बताया कि शुक्रवार को हस्ताक्षर होने के बाद ही नाकेबंदी हटाई जाएगी जबकि ट्रंप ने शुरू में इसके 'तुरंत हटाए जाने' की घोषणा की थी। मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान ने कहा कि इस समझौते में सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने का प्रावधान है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा 'दोनों पक्षों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करने का ऐलान किया है।' ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी कहा कि लेबनान समेत सभी सैन्य कार्रवाई सोमवार रात से हमेशा के लिए बंद हो जाएंगी।अब उम्मीद है कि इस समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा जिसे ईरान ने महीनों से बंद कर रखा था। इससे तेल, गैस और फर्टिलाइज़र जैसे उत्पादों की ग्लोबल सप्लाई में रुकावट आ गई थी। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी थी। इस ऐलान से बाजारों को तुरंत राहत मिली है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में करीब 4% की गिरावट आई जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में 4.6% से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई। एशियाई शेयर बाजारों में भी तेजी देखी गई।











