अमेरिकी डिफेंस डिप्लोमेसी में हार्ड पावर यानी सैन्य शक्ति पर जोर रहा है। फिर हेगसेथ के बयान का मतलब क्या है? क्या अब अमेरिका इससे पीछे हटना चाहता है? सवाल यह भी है कि क्या पश्चिम एशिया में अमेरिका इतना थक चुका है कि पैसिफिक में चल रहीं गतिविधियां उसे अपनी क्षमता से बाहर लग रही हैं? या वह एशिया में नए संतुलन बनाने के लिए खाली स्पेस ढूंढ रहा है? ऐसा है तो एशिया के सहयोगी देश सुरक्षा को लेकर अमेरिका और यूरोप पर निर्भर क्यों रहें?
एशिया-प्रशांत पर बदल गए डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के 'फेवरेबल बैलेंस ऑफ पावर' का क्या होगा?
नई दिल्ली: पिछले दिनों शांगरी-ला डायलॉग में अमेरिका के डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने कुछ बातें कहीं, जिनसे एशिया को लेकर नए संकेत मिले। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नई रणनीति भौगोलिक और कूटनीतिक रूप से पीछे हटने की है। अमेरिकी ‘डिफेंस डिप्लोमेसी’ इंडो-पैसिफिक में ‘फर्स्ट आइलैंड चेन’ तक सीमित है, जो जापान से शुरू होकर फिलिपींस तक जाती है। ऐसे में सवाल है कि एशिया पर नियंत्रण रखने के लिए अमेरिका का ‘फेवरेबल बैलेंस ऑफ पावर’ कहां है?
अमेरिकी डिफेंस डिप्लोमेसी में हार्ड पावर यानी सैन्य शक्ति पर जोर रहा है। फिर हेगसेथ के बयान का मतलब क्या है? क्या अब अमेरिका इससे पीछे हटना चाहता है? सवाल यह भी है कि क्या पश्चिम एशिया में अमेरिका इतना थक चुका है कि पैसिफिक में चल रहीं गतिविधियां उसे अपनी क्षमता से बाहर लग रही हैं? या वह एशिया में नए संतुलन बनाने के लिए खाली स्पेस ढूंढ रहा है? ऐसा है तो एशिया के सहयोगी देश सुरक्षा को लेकर अमेरिका और यूरोप पर निर्भर क्यों रहें?
अमेरिकी डिफेंस डिप्लोमेसी में हार्ड पावर यानी सैन्य शक्ति पर जोर रहा है। फिर हेगसेथ के बयान का मतलब क्या है? क्या अब अमेरिका इससे पीछे हटना चाहता है? सवाल यह भी है कि क्या पश्चिम एशिया में अमेरिका इतना थक चुका है कि पैसिफिक में चल रहीं गतिविधियां उसे अपनी क्षमता से बाहर लग रही हैं? या वह एशिया में नए संतुलन बनाने के लिए खाली स्पेस ढूंढ रहा है? ऐसा है तो एशिया के सहयोगी देश सुरक्षा को लेकर अमेरिका और यूरोप पर निर्भर क्यों रहें?











