रेस्क्यू कराई तीन महिलाओं में दो सगी बहने हैं, जबकि तीसरी महिला दोनों बहनों के गांव की है। तीनों को उनके पति प्रताड़ित करते थे, इसलिए वह पति से अलग हो गईं और काम के सिलसिले में कुछ महीने पहले मुंबई आईं। उन्हें कुछ लोगों के जरिए तथाकथित तौर पर एक इवेंट कंपनी से जुड़े नीलेश पाटील का पता चला। उन्होंने उससे संपर्क किया। छोटे से इंटरव्यू के बाद तीनों को नौकरी मिल गई। उन्हें अलग-अलग जगह इवेंट के बहाने भेजा जाने लगा।
बाद में नीलेश पाटील ने इन तीनों महिलाओं के फोटो अलग-अलग वॉट्सऐप ग्रुप में भेजने शुरू कर दिए। ग्राहक इन महिलाओं में किसी एक की फोटो सेलेक्ट करते थे और बाद में नीलेश उस लड़की को कहता था कि तुम्हें आज एक शो में इस या उस होटेल में जाना है। होटेल का कमरा ग्राहक बुक करता था। नीलेश का ड्राइवर नरेंद्र देवडे लड़की को लेकर उस होटेल ले जाता था। नीलेश को बदले में ग्राहक से 15 हजार रुपये मिलते थे।
जब डीसीपी राज तिलक रौशन को इस सेक्स रैकेट का पता चला, तो उन्होंने दहिसर क्राइम ब्रांच जांच करने को कहा। एक फर्जी ग्राहक तैयार किया गया और नीलेश पाटील से संपर्क किया गया। जैसे ही फर्जी ग्राहक नीलेश से मिलने गया, इंस्पेक्टर विलास भोसले, दिलीप तेजनकर और एपीआई विजय रासकर की टीम ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसका ड्राइवर भी पकड़ा गया।











