'आसरा' में मृत पड़े गोवंशी पशु, लगे कीड़े, प्रभारी बोलीं- आराम कर रहे हैं

'आसरा' में मृत पड़े गोवंशी पशु, लगे कीड़े, प्रभारी बोलीं- आराम कर रहे हैं
भोपाल । जहांगीराबाद स्थित आसरा पशु चिकित्सालय में बीमार पशुओं का इलाज करना तो दूर, उनके शव को भी नहीं हटाया जा रहा है। हालत यह है कि कई दिनों तक यहीं पड़े रहने के बाद मृत गोवंशों को कीड़े पड़ रहे हैं। ऐसा ही एक वीडियो तेजी से इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। जिसमें 10 से अधिक मृत गोवंशी पशु जमीन पर पड़े हैं। जब इस मामले में आसरा की प्रभारी डा. सुनीला सरन से बात की तो उनका कहना था कि वीडियो में जो जानवर दिख रहे हैं। वो मृत नहीं, बल्कि आराम कर रहे हैं। आप कभी आकर देख सकते हैं, यहां 10 से 15 जानवर इसी तरह पड़े रहते हैं।
बता दें कि शुक्रवार को इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हुआ। इसे शर्मिला जैन नाम की महिला ने बनाया है। यह वीडियो दो अप्रैल को सुबह आठ बजे बनाया गया है। इसमें करीब 10 पशु जमीन पर मरे पड़े हैं। इनमें से कुछ जानवरों के शव में कीड़े पड़ गए हैं, लेकिन नगर निगम के कर्मचारियों ने शव को हटाया नहीं था। इससे पता चलता है कि यहां मरने के बाद भी मवेशी यहीं पड़े रहते हैं। यहां तक कि मवेशियों के शव में कीड़े पड़ जाते हैं, फिर भी उन्हें नहीं हटाया जाता।

केज में सड़ रहे मृत श्वान

इधर आसरा पशु चिकित्सालय में ही श्वानों का अस्पताल भी है। जब यहां जाकर शर्मिला जैन ने देखा तो वहां भी दो श्वान केज के अंदर मरे पड़े थे। उनका शव सड़ गया था। इससे दूर तक दुर्गंध फैल रही थी, लेकिन इन्हें भी हटाया नहीं गया था। जब पशु प्रेमी महिला ने कर्मचारियों से शव को हटाने की बात कही तो चिकित्सालय में उनका प्रवेश बंद कर दिया।

गोवंश को नहीं मिल रहा चारा-पानी

वीडियो बनाने वाली महिला ने बताया कि जानवरों के लिए पर्याप्त शेड नहीं है। जिससे वो तेज धूप में बाहर ही पड़े रहते हैं। उनके लिए पर्याप्त चारा और पानी नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों का कहना था कि बीते दो दिनों से बोर नहीं चल रहा है। इसलिए जानवरों को पानी नहीं दिया गया है, वहीं नाम मात्र के लिए घास डाली जा रही है, जिसमें पशुओं का पेट भी नहीं भर रहा है।

प्रभारी ने माना, गोवंश की मृत्युदर अधिक

इस मामले में आसरा की प्रभारी डा. सुनीला का कहना है कि जानवर मरे नहीं हैं, बल्कि आराम कर रहे हैं। ये बात उन्होंने भी स्वीकार की है कि यहां जो पशु आते हैं। उनमें से कुछ तो आसरा पहुंचते ही दम तोड़ देते हैं। गर्मियों में प्रतिदिन छह से सात और वर्षा के दौरान 10-12 गोवंश मरते हैं।
Advertisement