हाई कोर्ट ने पाया था कि वेदांता ने हाई स्पीड डीजल का इस्तेमाल माइनिंग के इतर दूसरे कामों के लिए किया। इसमें ट्रांसपोर्टर्स और प्राइवेट पार्टीज को डीजल की रिसेल शामिल है। कंपनी के टैक्स रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के मुताबिक फ्यूल का इस्तेमाल आयरन ओर की माइनिंग और प्रोसेसिंग के लिए मशीनरी चलाने और उनके मेंटनेंस के लिए किया जाना था।
इनकम टैक्स विभाग की दलील
वेदांता ने गोवा वैट एक्ट और सेंट्रल सेल्स टैक्स एक्ट के तहत टैक्स रजिस्ट्रेशन हासिल किया था जिसे समय-समय पर रिन्यू किया गया। लेकिन 2017 में जीएसटी आने के बाद कंपनी नए सिस्टम में माइग्रेट कर गई और लेकिन उसने हाई स्पीड डीजल की खरीद पर सेंट्रल सेल्स टैक्स देना जारी रखा और वैट रजिस्ट्रेशन को भी बरकरार रखा।टैक्स अधिकारियों ने वेदांता को फॉर्म सी देने से इन्कार कर दिया था। उनका कहना था कि कंपनी सेंट्रल सेल्स टैक्स एक्ट के तहत अब डीलर नहीं रह गई है और उसका रजिस्ट्रेशन खत्म हो गया है। टैक्स डिपार्टमेंट ने अपनी दलील में कहा कि वेदांता कर्नाटक से खरीदे गए डीजल के लिए फॉर्म सी का यूज करना चाहती थी ताकि उसे 19 फीसदी वैट न देना पड़े। फॉर्म सी के तहत खरीदे गए डीजल पर केवल दो फीसदी टैक्स लगता है।











