विक्रम सिंह सोलंकी की गिनती अपनी पीढ़ी के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में होती है, लेकिन वह इंग्लैंड के लिए कभी वो मुकाम हासिल नहीं कर पाए, जिसकी उनसे उम्मीद थी। सोलंकी वनडे क्रिकेट में सुपर सब्सिट्यूट बनने वाले पहले इंटरनेशनल क्रिकेटर भी हैं। वह भारत के वसीम जाफर की तरह बदकिस्मत रहे, जो घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाने के बावजूद इंटरनेशनल क्रिकेट में बड़ा नाम नहीं कमा पाए। विक्रम सोलंकी ने 325 फर्स्ट क्लास मैच की 546 पारियों में 35.78 की औसत से 18359 रन बनाए, जिसमें 34 शतक और 98 अर्धशतक शामिल हैं।
विक्रम सोलंकी की उम्र तब सिर्फ आठ साल थी, जब उनका परिवार भारत से इंग्लैंड जा बसा। उन्होंने वॉल्वरहैम्प्टन में अपनी पढ़ाई पूरी की। 16 साल की उम्र में वॉर्सेस्टरशायर के लिए डेब्यू किया। विक्रम सिंह सोलंकी ने इंग्लैंड के लिए अपना आखिरी मुकाबला श्रीलंका के खिलाफ जुलाई 2006 में खेला। इसके बाद कोचिंग में हाथ आजमाया। साल 2018 में इंग्लैंड काउंटी टीम सर्रे के मुख्य कोच के पद से इस्तीफा दे दिया और फिर आईपीएल का रुख किया।
2018 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के सहायक कोच बने। 2022 में नई टीम गुजरात टाइटंस का सबसे बड़ा पद यानी डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट बने। गुजरात टाइटंस टीम के वह सर्वे-सर्वा है। हेड कोच आशीष नेहरा ने खास अंदाज में उन्हें बधाई दी है, जिसका वीडियो गुजरात फ्रैंचाइजी ने सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है।











