कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि शेख हसीना ने छात्रों के प्रदर्शन को कुचलने का आदेश दिया था। शेख हसीना के आदेश के बाद छात्र प्रदर्शनकारियों के आंदोलन को बुरी तरह से कुचला गया। छात्रों के प्रदर्शन को क्रूरता से कुचला जा रहा है इसकी जानकारी शेख हसीना को थी। सिर्फ इतना ही नहीं, घायलों को अस्पताल नहीं जाने दिया गया, अस्पतालों को इलाज करने से रोका गया, जो डॉक्टर घायलों का इलाज कर रहे थे, उन्हें तत्काल ट्रांसफर किया गया और ये मानवता के खिलाफ अपराध है। कोर्ट ने कहा कि पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून आज अदालत में मौजूद एकमात्र प्रतिवादी हैं। उन्होंने पिछले साल के विद्रोह में अपनी भूमिका के लिए जुलाई में दोष स्वीकार किया था और राज्य के गवाह के रूप में गवाही दी थी।शेख हसीना के कहने पर क्रूर हिंसा- कोर्ट
कोर्ट ने कहा है कि शेख हसीना ने हेलीकॉप्टर से प्रदर्शनकारियों पर घातक हथियारों के इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी और उनके आदेश पर ही ड्रोन से प्रदर्शनकारियों पर नजर रखी गई। जिसकी वजह से 1400 प्रदर्शनकारी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, उन्हें घातक हथियारों का इस्तेमाल करके मौत के घाट उतारा गया। इसीलिए शेख हसीना, असदुज्जमां खान कमाल (तत्कालीन गृह मंत्री) और चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून (तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक) को इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।कोर्ट ने कहा कि शेख हसीना ने ढाका यूनिवर्सिटी के VC को टेलीफोन पर धमकाया था कि जिस तरह से रजाकारों को फांसी की गई थी, उसी तरह से इन प्रदर्शनाकिरियों को भी मार दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि शेख हसीना ने प्रदर्शनकारियों पर हेलीकॉप्टर से घातक बम गिराने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा कि किस तरह से क्रूरता से प्रदर्शनकारियों को मारा जा रहा था, उसकी सारी जानकारी शेख हसीना के पास थी। खुद शेख हसीना ही ऐसे हमलों का आदेश दे रही थी। शेख हसीना के कहने पर पुलिस ने हिंसक कार्रवाई की और 1400 लोगों को मार डाला। ढाका यूनिवर्सिटी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने घातक हथियारों का इस्तेमाल किया और उनपर गोलीबारी की।











