मध्य प्रदेश में एससी की तुलना में आदिवासी सीटों पर भाजपा को कांग्रेस से मिलती है कड़ी चुनौती

मध्य प्रदेश में एससी की तुलना में आदिवासी सीटों पर भाजपा को कांग्रेस से मिलती है कड़ी चुनौती
भोपाल। वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भले ही भाजपा ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सभी 10 सीटें जीतीं पर एससी की तुलना में एसटी सीटों पर कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी चुनौती दी। दोनों चुनाव में चारों एससी सीटों पर भाजपा प्रत्याशी कांग्रेस से लगभग 21 प्रतिशत से अधिक मतों से जीते, पर एसटी की अधिकतम सीटों पर भाजपा 15 प्रतिशत से कम मतों के अंतर से ही जीत पाई।

मंडला से भाजपा प्रत्याशी फग्गन सिंह कुलस्ते और रतलाम से गुमान सिंह डामोर तो 10 प्रतिशत से भी कम अंतर से 2019 में जीते थे। गत विधानसभा चुनाव में भी एसटी के लिए आरक्षित 47 सीटों में भाजपा ने 24, कांग्रेस ने 22 और एक सीट भारत आदिवासी पार्टी ने जीती थी। यही कारण है कि भाजपा लोकसभा चुनाव में आदिवासी वर्ग पर ज्यादा ध्यान दे रही है।

वर्ष 2009 में एसटी की छह में चार सीट हारने के बाद से भाजपा एसटी वर्ग को साधने में जुटी

वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में एसटी वर्ग के लिए आरक्षित छह सीटों में से कांंग्रेस ने चार सीटें जीती थी। धार से गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, मंडला से बसोरी सिंह मसराम, रतलाम से कांतिलाल भूरिया और शहडोल से राजेश नंदिनी सिंह जीती थीं। बैतूल से भाजपा की ज्योति धुर्वे और खरगोन से माखन सिंह सोलंकी विजयी हुए थे।

एससी की चार सीटों में भी दो कांग्रेस की झोली में आई थीं। इसके बाद से प्रदेश की भाजपा सरकार ने आदिवासी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए कई बड़े काम किए। पेसा कानून लागू किया गया। बैगा, सहारिया और भारिया जनजाति की महिलाओं एक हजार रुपये प्रतिमाह आहार अनुदान देने की शुरुआत हुई। देश के पहले विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन हबीबगंज का नाम गोंड रानी कमलापति के नाम से किया गया है। वर्ष 2014 से केंद्र की भाजपा सरकार ने भी जनजातियों के हित में कई बड़े काम किया।

एससी-एसटी सीटों पर वर्ष 2014 और 2019 में भाजपा-कांग्रेस में जीत का अंतर ( मत प्रतिशत में )

सीट-- श्रेणी-- 2014 में जीती पार्टी/ जीत का अंतर-- 2019 में जीती पार्टी/ जीत का अंतर

भिंड-- एससी-- भाजपा/ 22 प्रतिशत-- भाजपा/ 20.81 प्रतिशत

देवास--एससी-- भाजपा/ 22.96 प्रतिशत -- भाजपा/ 26.61 प्रतिशत

टीकमगढ़--एससी--भाजपा/27.60 प्रतिशत --भाजपा/ 31.74 प्रतिशत

उज्जैन-- एससी-- भाजपा/30.84 प्रतिशत-- भाजपा/ 29.19 प्रतिशत

बैतूल --एसटी--भाजपा/ 32.19 प्रतिशत -- भाजपा/ 26.53 प्रतिशत

धार-- एसटी -- भाजपा/ 9.83 प्रतिशत-- भाजपा/ 11.61 प्रतिशत

खरगोन-- एसटी--भाजपा/ 22.81 प्रतिशत-- भाजपा/ 14.19 प्रतिशत

मंडला-- एसटी-- भाजपा/ 9.28 प्रतिशत-- भाजपा/ 6.44 प्रतिशत

रतलाम-- एसटी-- भाजपा/ 10.31 प्रतिशत-- भाजपा/ 6.47 प्रतिशत

शहडोल -- एसटी-- भाजपा/25 प्रतिशत-- भाजपा/ 32.38 प्रतिशत

देश में कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति में भ्रम का एक जाल बुन रखा था। हमारी सरकारें जब-जब आईं उन मिथकों को तोड़ा है। अब यह जनजाति वर्ग समझता है कि उसके भले के लिए किसी ने काम किया तो वह भाजपा सरकार है। उस वर्ग के लिए पेसा एक्ट हो, रोजगार सृजन के लिए घर-घर राशन योजना हो या फिर उनके नायक बिरसा मुंडा, रानी कमलापति, रघुनाथ शाह और शंकर शाह को उचित सम्मान और स्थान दिलाने की बात हो यह सब काम भाजपा की सराकारों ने किए हैँ। विधानसभा चुनाव में जनजाति वर्ग का पूरा आशीर्वाद हमे मिला है। लोकसभा चुनाव में भी मत प्रतिशत के नए आयाम स्थापित होंगे। - आशीष अग्रवाल, प्रदेश मीडिया प्रभारी, भाजपा

आदिवासियों पर अत्याचार के एक से एक बड़े मामले भाजपा सरकार में सामने आए हैं। भाजपा सरकार संविधान विरोधी है। कांग्रेस हमेशा आदिवासियों के हितों की लड़ाई लड़ती आई है। सरकार में रहकर भी इस वर्ग के हित में कई बड़े काम कांग्रेस ने किए थे। यही कारण है कि आदिवासी वर्ग कांग्रेस के साथ था, साथ है और साथ रहेगा। - डा. विक्रांत भूरिया, प्रदेश अध्यक्ष युवक कांग्रेस

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