TDSAT ने अपने आदेश में यह रकम लौटाने और इसे अडजस्ट करने की भी रियायत दी है। ऐसा कहा जा रहा है कि कंपनी को अगले कुछ महीनों में लाइसेंस की फीस में 755 करोड़ रुपये की रकम को अडजस्ट कर सकती है। ऐसे में यह कंपनी के लिहाज से कर्ज से जूझने के दौरान बहुत बड़ी राहत है। इस खबर से सोमवार को VI का स्टॉक इंट्राडे में 3 पर्सेंट तक उछला।
गौरतलब है कि वोडाफोन आइडिया द्वारा दोनों कंपनियों के मर्जर के समय ये रकम चुकाई गई थी। 2019 में VI ने ट्रिब्यूनल का रुख किया था, जिसमें पूर्ववर्ती वोडाफोन के विलय से जुड़ी स्पेक्ट्रम देनदारियों के लिए DoT की 3,926.34 रुपये की मांग को चुनौती दी गई थी। सरकार ने बाद में VI के बकाए की फिर से गिनती की और इसे संशोधित कर 3,170.82 करोड़ रुपये कर दिया।
लेकिन चूंकि VI ने सरकार द्वारा मांगे गए 3,926.34 करोड़ रुपये पहले ही 'विरोध के तहत' जमा कर दिए थे, इसलिए ट्रिब्यूनल ने जमा अतिरिक्त राशि को VI के वर्तमान वैधानिक बकाया के साथ समायोजित करने का निर्देश दिया है। हालांकि इसके बारे में VI ने किसी तरह की क्वेरी का जवाब नहीं दिया।
लेकिन चूंकि VI ने सरकार द्वारा मांगे गए 3,926.34 करोड़ रुपये पहले ही 'विरोध के तहत' जमा कर दिए थे, इसलिए ट्रिब्यूनल ने जमा अतिरिक्त राशि को VI के वर्तमान वैधानिक बकाया के साथ समायोजित करने का निर्देश दिया है। हालांकि इसके बारे में VI ने किसी तरह की क्वेरी का जवाब नहीं दिया।











