चूक नहीं मान रहा था बैंक, आइटी कोर्ट ने डिजिटल सिग्नेचर पर रोक लगा वापस दिलवाए रुपये

चूक नहीं मान रहा था बैंक, आइटी कोर्ट ने डिजिटल सिग्नेचर पर रोक लगा वापस दिलवाए रुपये
भोपाल। साइबर और बैंकों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों की सुनवाई करने वाली मध्य प्रदेश की आइटी कोर्ट (कोर्ट आफ एडीजुडिकेटिंग आफिसर) ने बैंकों को सबक सिखाने वाला ऐसा फैसला सुनाया है जो उदाहरण बन सकता है। एक उपभोक्ता के खाते से उसकी गलती के बिना रुपये निकल जाने के मामले में कोर्ट ने स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआइ) की ब्योहारी (शहडोल) शाखा की ओर से सुरक्षा में कमी मानते हुए उपभोक्ता को 80 हजार रुपये लौटाने के निर्देश दिए थे। आदेश के एक साल बाद तक रुपये नहीं चुकाने पर आइटी कोर्ट ने उस बैंक शाखा के डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट को निलंबित करने का आदेश दे दिया। उक्त बैंक शाखा का कामकाज ठप होने की नौबत आते ही बैंक ने दो दिन के भीतर रुपये चुका दिए।


डेबिट कार्ड घर पर था, एटीएम से निकल गए थे रुपये

शहडोल निवासी बालेंद्र प्रसाद सोनी जुलाई, 2019 में एटीएम पर गए लेकिन रुपये नहीं निकले। उन्होंने कार्ड घर में ही रखा था। कुछ दिन बाद उनके खाते से तीन बार में 80 हजार रुपये निकल गए। ट्रांजेक्शन एटीएम से किया गया था। बालेंद्र सोनी ने बैंक शाखा के अलावा साइबर सेल भोपाल में भी शिकायत दर्ज कराई।


बैंक ने तर्क दिया कि रुपये बालेंद्र सोनी के डेबिट कार्ड से एटीएम के माध्यम से निकले हैं, गलती उपभोक्ता की है। कोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि वह एटीएम का सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत कर सिद्ध करे कि रुपये किसने निकाले हैं। बैंक बालेंद्र सोनी के कार्ड से रुपये निकाला जाना सिद्ध नहीं कर पाई।

अधिकारी एटीएम की सीसीटीवी रिकार्डिंग भी पेश नहीं कर पाए। आइटी कोर्ट ने पाया कि एटीएम कार्ड का क्लोन बनाकर किसी ठग ने रुपये निकाले हैं। 24 मार्च, 2023 को कोर्ट ने निर्णय दिया कि बैंक पीड़ित को 80 हजार रुपये ब्याज सहित चुकाए।

Advertisement