जमात-ए-इस्लामी कर सकती है गड़बड़ी
बांग्लादेश में अभी बीएनपी प्रमुख रूप से आगे बताई जा रही हैं लेकिन आशंका है कि चुनावों में हेराफेरी करके उसे रोका जा सकता है और जमात-ए-इस्लामी वाला गठबंधन सरकार बनाने की कोशिश कर सकता है। अमेरिका और ब्रिटेन के संपर्क में आने के बाद जमात-ए-इस्लामी का हौसला बढ़ा है। आरोप है कि बांग्लादेश के अस्थिरता भरे माहौल में अमेरिका ने जमात-ए-इस्लामी को पर्दे के पीछे से अपना समर्थन दिया है।चुनाव के बाद भी यूनुस नहीं छोड़ेंगे पद!
इस बीच कहा जा रहा है कि अगर BNP चुनाव में बहुमत जीत भी जाती है तो भी वह तुरंत सत्ता में नहीं पाएगी। सभी चुने हुए सांसद छह महीने के लिए संवैधानिक सुधार परिषद या संविधान सभा के रूप में बैठ सकते हैं। यहां संविधान के कुछ हिस्सों को फिर से लिखा जा सकता है और कुछ कानून पास हो सकते हैं। पता चला है कि तब तक अंतरिम प्रशासन ही सत्ता में रहेगा। जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के संविधान में बड़े बदलाव का इरादा रखती है।बांग्लादेश के जानकारों के अनुसार, सत्ता में बने रहने से अंतरिम प्रशासन को नीतियों में हेराफेरी करने के लिए एक फायदा और समय मिल जाएगा। तारिक रहमान ने वोटों की धांधली रोकने के लिए सभी से तैयार रहने को कहा है। उन्होंने कहा, मुसलमानों को तहज्जुद की नमाज पढ़नी चाहिए और फिर 12 फरवरी की सुबह-सुबह अपने पोलिंग स्टेशनों पर पहुंचकर जमात में फज्र की नमाज पढ़नी चाहिए।











