बजरंग और साक्षी उन पहलवानों में शामिल थे जिन्होंने दो महीने तक बृज भूषण के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन की अगुआई की थी। भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृज भूषण पर यौन उत्पीड़न के कई आरोप लगे हैं। तोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता बजरंग के अनुसार उन्होंने अपना विरोध-प्रदर्शन वापस लिया था क्योंकि सरकार ने आश्वासन दिया था कि बृज भूषण से जुड़ा कोई व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ पाएगा।
बृज भूषण के विश्वासपात्र संजय सिंह और 2010 राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता अनिता श्योराण डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष पद के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं। बजरंग ने कहा, ‘हां, आज हमने खेल मंत्री से मुलाकात की और उन्हें उनका वादा याद दिलाया कि बृज भूषण से जुड़ा कोई व्यक्ति डब्ल्यूएफआई चुनाव नहीं लड़ेगा। संजय सिंह उसका करीबी है और उसे चुनाव से हटना चाहिए या फिर हम जल्द ही अपनी भविष्य की कार्रवाई पर फैसला करेंगे। हमने मंत्री को यह बता दिया है।’
बजरंग ने कहा कि उन्हें अनिता से कोई समस्या नहीं है क्योंकि वह पूर्व पहलवान है और खिलाड़ियों के हालात से वाकिफ है। उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि कोई पूर्व पहलवान डब्ल्यूएफआई का प्रभार संभाले जिसे कम से कम यह तो पता हो कि देश के लिए पदक जीतने के लिए क्या करना होता है। अनिता राष्ट्रमंडल खेलों की पदक विजेता हैं और पहलवानों की मांगों को समझती हैं।’
डब्ल्यूएफआई की पहला महिला अध्यक्ष बनने के लिए चुनौती पेश कर रहीं अनिता बृज भूषण के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में कथित तौर पर गवाह हैं। बृज भूषण पर यौन उत्पीड़न के कई आरोप लगे हैं और वह अभी जमानत पर हैं। वह डब्ल्यूएफआई का चुनाव नहीं लड़ सकते क्योंकि पदाधिकारी के रूप में 12 साल पूरे कर चुके हैं जो राष्ट्रीय खेल संहिता के तहत अधिकतम कार्यकाल है।
बजरंग ने कहा कि उन्हें अनिता से कोई समस्या नहीं है क्योंकि वह पूर्व पहलवान है और खिलाड़ियों के हालात से वाकिफ है। उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि कोई पूर्व पहलवान डब्ल्यूएफआई का प्रभार संभाले जिसे कम से कम यह तो पता हो कि देश के लिए पदक जीतने के लिए क्या करना होता है। अनिता राष्ट्रमंडल खेलों की पदक विजेता हैं और पहलवानों की मांगों को समझती हैं।’
डब्ल्यूएफआई की पहला महिला अध्यक्ष बनने के लिए चुनौती पेश कर रहीं अनिता बृज भूषण के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में कथित तौर पर गवाह हैं। बृज भूषण पर यौन उत्पीड़न के कई आरोप लगे हैं और वह अभी जमानत पर हैं। वह डब्ल्यूएफआई का चुनाव नहीं लड़ सकते क्योंकि पदाधिकारी के रूप में 12 साल पूरे कर चुके हैं जो राष्ट्रीय खेल संहिता के तहत अधिकतम कार्यकाल है।











