हिसार के गांव भगाना की पहलवान अंतिम पंघाल का नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है। एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद अब वह ओलिंपिक की तैयारी कर रही हैं। उनका सपना है कि वह ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीते। अंतिम पंघाल ने पहली बार एशियन गेम्स खेलते हुए ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।
अंतिम पंघाल ने 53 किलोग्राम भारवर्ग में ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई किया है। अंतिम के पिता खेतीबाड़ी करते हैं और मां हाउस वाइफ है। वे 5 बहन-भाई हैं, जिनमें से 4 बहन और एक भाई है। अंतिम पंघाल का कहना है कि वे सुबह करीब साढ़े 5 बजे प्रैक्टिस पर जाती है और करीब साढ़े 9 बजे तक अभ्यास करती है। वहीं शाम को 5 से करीब साढ़े 8 बजे तक अभ्यास करती है।
पहलवान बनाने के लिए पिता ने बेची डेढ़ एकड़ जमीन
अंतिम के पिता रामनिवास ने अपनी बेटी को पहलवान बनाने के लिए जमीन तक बेची दी थी। अंतिम पिछले करीब साढ़े 6-7 साल से अभ्यास कर रही है। उनकी बेटी के अभ्यास करवाने के लिए जब आर्थिक तंगी आई तो उन्होंने अपनी करीब डेढ़ एकड़ जमीन बेच दी थी। बेटी को कामयाब करने के संघर्ष में आर्थिक परेशानी बाधा न बने, इसलिए उन्होंने अपनी जमीन बेचनी पड़ी। जो कुछ परेशानी हुई उसके अब सकारात्मक परिणाम आने पर खुश है।











