अमले के साथ अन्य संसाधनों की भी कमी
बता दें कि शहर की वर्तमान जनसंख्या के अनुसार नगर निगम में चार फायर आफिसर और एक मुख्य फायर आफिसर होना चाहिए, लेकिन निगम के पास एक भी नहीं है। निगम में मात्र दो ही सहायक फायर आफिसर हैं, जबकि कम से कम आठ होने चाहिए। साथ ही नेशनल फायर एडवायजरी के तहत दो लाख की आबादी और एक से तीन किमी क्षेत्र में एक फायर स्टेशन होना चाहिए लेकिन राजधानी में 28 लाख की आबादी पर मात्र 11 फायर सब स्टेशन ही हैं। इनमें से आठ ही सक्रिय हैं, जबकि तीन फायर स्टेशन आइएसबीटी, यूनानी सफाखाना और कबाड़खाने में एक-एक दमकल खड़ी रहती है। यहां पर्याप्त व्यवस्थाओं की कमी है। यही नहीं, जो फायर सब स्टेशन हैं, वे भी अपने से आठ से दस किमी के क्षेत्र को ही कवर कर रहे हैं। इससे आग लगने पर राहत और बचाव कार्य शुरू होने में समय अधिक लगता है।
प्रत्येक जोन में होना चाहिए एक फायर स्टेशन
शहर में अभी आइएसबीटी, गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, पुल बोगदा, छोला फायर स्टेशन, पुराना कबाड़खाना, गांधी नगर एयरपोर्ट, संत हिरदाराम नगर, कोलार, माता मंदिर, यूनानी शफाखाना व फतेहगढ़ कंट्रोल रूम को मिलाकर कुल 11 फायर स्टेशन हैं, जबकि शहरी क्षेत्र में प्रत्येक जोन के हिसाब से एक बनाया जाना था। हाइड्रेंट सिस्टम भी सिर्फ सराफा चौक में लगाया, वो भी चालू नहीं हो सका। इसके अलावा फायर कर्मियों के पास आधुनिक गैजेट भी नहीं है और वे पुराने परंपरागत तरीकों से हो आग बुझा रहे हैं।
28 लाख की जनसंख्या पर 35 फायर ब्रिगेड और वाटर टैंकर
नगर निगम 28 लाख जनसंख्या पर कुल 35 फायर ब्रिगेड और वाटर टैंकर हैं। लेकिन इनमें से भी चार से पांच गाड़ियां रोज वीआइपी आयोजन में तैनात रहती हैं। न्यू मार्केट व आदमपुर छावनी में भी 1-1 गाड़ी अस्थायी फायर स्टेशन बनाकर तैनात की गई है। ऐसे में आगजनी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए इनकी संख्या और कम हो जाती है।
5.40 करोड़ रुपये के हाइड्रोलिक प्लेटफार्म के लिए कर्मचारी नहीं
शहर की जनसंख्या के साथ बहुमंजिला इमारतों की संख्या भी बढ़ रही है। यहां 20 से 22 मंजिला इमारतों का निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे भवनों में आग लगने पर राहत और बचाव के लिए नगर निगम द्वारा बीते डेढ़ वर्ष पहले 5.40 करोड़ रुपये से 170 फीट ऊंचा हाइड्रोलिक प्लेटफार्म खरीदा गया है। इसकी क्षमता 18 मंजिल तक आग बुझाने की है। लेकिन इसके लिए कुशल कर्मचारियों भी नहीं है। अब तक इसे चलाने के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति भी नहीं की गई और ना ही इन्हें प्रशिक्षित किया गया।
नगर निगम अग्निशमन सेवाओं को निरंतर बढ़ा रहा है। जिससे संपूर्ण शहर में आग की घटनाओं पर राहत और बचाव आसान हो। यदि कहीं कमी है तो सुधार किया जाएगा।
- रामेश्वर नील, प्रभारी अग्निशमन शाखा, भोपाल नगर निगम











