निवेश से पहले समझे क्या है प्लान
आप कहीं भी निवेश करें, उससे पहले इस बात को समझे कि आखिर निवेश क्यों कर रहे हैं। निवेश का मकसद क्या है? टैक्स बचाना, बचत के पैसों को बढ़ाना और किसी भी मुश्किल में आर्थिक सुरक्षा देने के लिए मिलने वाले इंश्योरेंस कवर के अलग-अलग लक्ष्य हैं। यानी अलग-अलग टारगेट के लिए अलग-अलग निवेश करना चाहिए।शर्तों के साथ टैक्स सेविंग इंस्टूमेंट
टैक्स बचाने के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग जरूरी है। लेकिन सिर्फ टैक्स बचाने के लिए निवेश आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं। सिर्फ टैक्स सेविंग स्कीम पर फोकस कर भले ही आप टैक्स बचा लें, लेकिन अपने फाइनेंशियल लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएंगे। इसके नुकसान की बात करें तो टैक्स सेविंग की तीन कमजोरियां आपको नुकसान पहुंचा सकती हैं। अगर आप सिर्फ टैक्स सेविंग के मकसद से किसी इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं तो आपके द्वारा निवेश के लिए चुना गया इंस्ट्रूमेंट या स्कीम कई शर्तों और लॉक-इन पीरियड के साथ आता है। इनवेंस्टमेंट साइज, लॉक-इन पीरियड, निश्चित रिटर्न जैसी कई शर्तें इसके साथ जुड़ी रहती हैं। टैक्स सेविंग स्कीम लॉक इन पीरियड के साथ आते हैं। आप लॉक इन पीरियड से पहले उस निवेश को भुना नहीं सकते हैं। टैक्स सेविंग स्कीम में आप अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं। अगर आपको सालाना 1.5 लाख से अधिक का निवेश करना है तो आपके पास टैक्स सेविंग के अधिक विकल्प नहीं है। टैक्स सेविंग स्कीम्स में निवेश करने पर मामूली रिटर्न मिलता है। वहीं टैक्स सेविंग स्कीम्स के निवेशकों को बाजार की मजबूती का बहुत लाभ नहीं मिलता है।











