रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कर्जदाता एयर इंडिया के बोर्ड और टाटा संस के नेतृत्व को लेकर भी स्पष्टता चाहते हैं। एन चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन होने के साथ एयर इंडिया के बोर्ड के भी चेयरमैन हैं।
कैशफ्लो को लेकर मांगी जानकारी
इकोनॉमिक टाइम्स मुताबिक, कुछ निजी क्षेत्र के बैंक एयर इंडिया की कैशफ्लो स्थिति और टर्नअराउंड प्लान को लेकर ज्यादा स्पष्टता चाहते हैं। वहीं, सरकारी बैंक मौजूदा क्रेडिट लाइन को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इसके पीछे टाटा ग्रुप के साथ उनका संबंध और एयर इंडिया की मजबूत क्रेडिट रेटिंग को प्रमुख वजह माना जा रहा है।AAA क्रेडिट रेटिंग के बावजूद सवाल
एयर इंडिया को AAA क्रेडिट रेटिंग हासिल है, जिसे सबसे कम जोखिम वाली रेटिंग माना जाता है। इसके बावजूद कुछ बैंक एयर इंडिया एयरलाइन के लगातार घाटे और कैशफ्लो को लेकर सतर्क हैं।टाटा ग्रुप ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया। ग्रुप के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एविएशन जैसे नए कारोबार को मुनाफे में आने में समय लगता है और एयरलाइन की स्थिति असामान्य नहीं है। उनके मुताबिक, लोन की ब्याज दरों को लेकर बातचीत चल रही है और एयर इंडिया को एक प्रमुख बैंक से पहले ही पर्याप्त कर्ज मिल चुका है।
एक साल में दोगुने से ज्यादा घाटा
- एयर इंडिया का कंसोलिडेटेड घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया।
- वित्त वर्ष 2024-25 में यह घाटा 10,858 करोड़ रुपये था। यानी एक साल में घाटा दोगुने से भी ज्यादा हो गया।
- घाटे में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह विदेशी मुद्रा से जुड़ा नुकसान भी रहा।
- FY26 में एयरलाइन का फॉरेन एक्सचेंज लॉस बढ़कर 7,388 करोड़ रुपये हो गया, जबकि FY25 में यह 1,545 करोड़ रुपये था।
