मोदी के खिलाफ अमेरिका का K-2 प्लान, भारत विरोधी अलगाववादियों को बाइडन का खुला समर्थन!
Updated on
06 Apr 2024, 12:52 PM
वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के संबंधों में इन दिनों तल्खियां बढ़ती जा रही हैं। यह सब तब हो रहा है, जब इस साल दोनों देशों में चुनाव होने वाले हैं। हाल के दिनों में भारत और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर खुलकर असहमति सामने आई। इस बार मुद्दा अंतरराष्ट्रीय नहीं था बल्कि भारत के अपने सियासी मुद्दे थे। मोदी सरकार ने आम चुनाव से पहले नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू किया तो अमेरिका ने इस पर खुलकर असहमति जताई। दिल्ली आबाकारी नीति मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ईडी ने गिरफ्तार किया तब भी अमेरिका ने बयान दिया। इसके बाद से भारत में अमेरिकी दूतावास में कश्मीरी अलगाववादियों को इफ्तार पार्टी में बुलाया गया। ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका एक बार फिर भारत के खिलाफ K-2 रणनीति को लागू कर रहा है।अमेरिका का K-2 प्लान क्या है
अमेरिका ने पहली बार 1970 के दशक में K-2 रणनीति को लागू किया था। इसका मकसद भारत में कश्मीरी अलगाववादियों और खालिस्तान समर्थक अलगाववादियों के बीच सहयोग को गुप्त रूप से समर्थन और सुविधा प्रदान करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बात के पुख्ता संकेत हैं कि अमेरिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बढ़ते घरेलू और वैश्विक प्रभाव को रोकने के लिए खालिस्तान समर्थक और कश्मीरी अलगाववादियों के लिए अपना समर्थन फिर से शुरू कर दिया है।