अमेरिका का आरोप है कि इन भारतीय कंपनियों को अच्छी तरह पता था कि वे ईरान के तेल व्यापार पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रही हैं। अमेरिका ईरान पर दबाव बनाना चाहता है ताकि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद कर दे। पाबंदी के तहत इन कंपनियों की अमेरिका में या अमेरिकी लोगों के नियंत्रण वाली एसेट को फ्रीज कर दिया जाएगा। प्रतिबंधित कंपनियों में अगर किसी कंपनी की 50% या उससे ज्यादा हिस्सेदारी है तो वह कंपनी भी ब्लॉक हो जाएगी।
क्या है आरोप?
भारत की अलकेमिकल सॉल्यूशंस पर आरोप है कि उसने जनवरी से दिसंबर 2024 के बीच 84 मिलियन डॉलर से ज्यादा के ईरानी पेट्रोकेमिकल आयात किए। इसी तरह ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स लिमिटेड पर जुलाई 2024 से जनवरी 2025 के बीच ईरान से 51 मिलियन डॉलर से ज्यादा का मेथनॉल और दूसरे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट खरीदे। जूपिटर डाई केम प्राइवेट लिमिटेड ने इस दौरान लगभग 49 मिलियन डॉलर का ईरानी सामान खरीदा।रमणीकलाल एस गोसालिया एंड कंपनी पर 22 मिलियन डॉलर से ज्यादा का मेथनॉल और टोलुइन खरीदने का आरोप है। अमेरिका का आरोप है कि परसिसटेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड ने अक्टूबर से दिसंबर 2024 के बीच लगभग 14 मिलियन डॉलर का मेथनॉल आयात किया। इसी तरह कंचन पॉलीमर्स पर 1.3 मिलियन डॉलर से ज्यादा के ईरानी पॉलीथीन उत्पाद खरीदने का आरोप है। विदेश विभाग का कहना है कि इन पाबंदियों का मकसद कंपनियों को सजा देना नहीं है, बल्कि उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना है।"











