नई दिल्ली: अमेजन प्राइम वीडियो पर सालाना सब्सक्रिप्शन लेने के बावजूद विज्ञापन दिखाना कंपनी को महंगा पड़ गया। हैदराबाद की जिला उपभोक्ता आयोग-I (कंज्यूमर कोर्ट) ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। इस मामले में कोर्ट ने अमेजन पर भारी जुर्माना लगाया है।
आयोग ने कंपनी को ग्राहक की 1,499 रुपये की सब्सक्रिप्शन फीस लौटाने के साथ 5,000 रुपये का मुआवजा और 3,000 रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है। इस तरह ग्राहक को कुल 9,499 रुपये मिलेंगे। आयोग का यह आदेश 1 अक्टूबर 2026 को आया। शिकायत करने वाले कोंधोबा राजेश पेशे से वकील हैं और उन्होंने खुद अपना पक्ष रखा।
कंपनी ने दिखाने शुरू किए विज्ञापन
राजेश ने 11 मई 2025 को 1,499 रुपये में Amazon Prime की एक साल की मेंबरशिप ली थी। उनका दावा था कि इस प्लान में मोबाइल, टीवी और लैपटॉप पर अमेजन प्राइम का कंटेंट बिना विज्ञापनों के देखने की सुविधा शामिल थी।
राजेश के मुताबिक, शुरुआत में उन्हें बिना विज्ञापनों के वीडियो देखने की सुविधा मिली। लेकिन 17 जून 2025 को, यानी सदस्यता खत्म होने से पहले ही, वीडियो के दौरान विज्ञापन दिखने लगे। इसके बाद उनसे विज्ञापन हटाकर कंटेंट देखने के लिए अलग से 699 रुपये देने को कहा गया।
कस्टमर सपोर्ट से नहीं मिली मदद
राजेश ने कंपनी के कस्टमर सपोर्ट से संपर्क कर पहले जैसी सुविधा बहाल करने या पूरी सब्सक्रिप्शन फीस लौटाने की मांग की। आरोप है कि कंपनी ने दोनों मांगें स्वीकार नहीं कीं और केवल इस्तेमाल की गई अवधि के हिसाब से कुछ रकम लौटाने की पेशकश की।
राजेश का कहना था कि जब उन्होंने सालाना प्लान खरीदा था, तब विज्ञापन-मुक्त वीडियो देखने की सुविधा उसका हिस्सा थी। सदस्यता की अवधि पूरी होने से पहले इस सुविधा को हटाना और इसके लिए अतिरिक्त पैसे मांगना तय शर्तों में बदलाव है। उन्होंने 1,499 रुपये की पूरी फीस वापस करने के अलावा 25,000 रुपये मुआवजे और 10,000 रुपये मुकदमे के खर्च की मांग की थी।
आयोग ने क्या कहा?
आयोग ने कहा कि ग्राहक की सालाना सदस्यता चालू रहने के दौरान ही विज्ञापन दिखाने शुरू कर दिए गए। कंपनी यह भी साबित नहीं कर सकी कि प्लान खरीदते समय ग्राहक को बताया गया था कि सदस्यता की अवधि के बीच विज्ञापन-मुक्त सुविधा हटाई जा सकती है या इसके लिए अलग से भुगतान करना पड़ सकता है।
अमेजन की ओर से आयोग में कोई प्रतिनिधि पेश नहीं हुआ और न ही लिखित जवाब दाखिल किया गया। इसके बाद आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायतकर्ता की दलीलों के आधार पर फैसला सुनाया। आयोग ने माना कि तय अवधि के दौरान विज्ञापन-मुक्त सुविधा हटाना और उसे जारी रखने के लिए अतिरिक्त पैसे मांगना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। हालांकि, आयोग ने ग्राहक की ओर से मांगे गए पूरे मुआवजे के बजाय कम रकम देने का आदेश दिया।
अमेजन को कितने पैसे देने होंगे?
आयोग ने कंपनी को 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है। अमेजन को अब कुल 9,499 रुपये देने होंगे। इस रकम में 1,499 रुपये सालाना सब्सक्रिप्शन फीस की वापसी, 5,000 रुपये ग्राहक को मुआवजा और 3,000 रुपये मुकदमे का खर्च शामिल है।

