2 बार IIM के एंट्रेंस में आए 100 पर्सेंटाइल
बायजू मैथ्स में बहुत अच्छे थे। छुट्टियों में रविंद्रन जब भारत आए, तो उन्होंने अपने कुछ दोस्तों की आईआईएम के एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी में मदद की। बायजू को लगा कि उन्हें भी IIM देना चाहिए। उन्होंने एंट्रेंस दिया। रिजल्ट आया तो पता चला कि उन्हें 100 पर्सेंटाइल मिले थे। बायजू को लगा कि यह शायद कोई संयोग होगा। उन्होंने फिर से आईआईएम का एंट्रेंस टेस्ट दिया और फिर से उनका स्कोर 100 पर्सेंटाइल था। अब उन्होंने आईआईएम जॉइन करने के बजाय कोचिंग क्लास शुरू करने का फैसला किया।
हर हफ्ते करते थे 9 शहरों की यात्रा
रवींद्रन को कोचिंग में मजा आ रहा था। इसलिए उन्होंने इसके लिए नौकरी भी छोड़ दी। शुरुआत में बायजू छोटे कमरों में छोटे ग्रुप्स को कोचिंग देते थे। रवींद्रन का पढ़ाने का तरीका इतना मजेदार था कि स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ती ही चली गई। रवींद्रन की पत्नी और बायजूस की को-फाउंडर दिव्या गोकुलनाथ ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'रवींद्रन हर हफ्ते 9 शहरों की यात्रा करते थे और स्टेडियम में स्टूडेंट्स को मैथ पढ़ाते थे।'
25,000 स्टूडेंट्स को स्टेडियम में एक साथ पढ़ाते थे मैथ्स
गोकुलनाथ ने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, 'हमने एक किराये के कमरे और 40 स्टूडेंट्स के साथ बायजूस की जर्नी शुरू की थी।' वे कहती हैं, 'हमारा पढ़ाने का तरीका इतना यूनीक था कि स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ती चली गई।' स्टूडेंट्स इतने आने लगे कि बायजू क बड़े ऑडिटोरियम में शिफ्ट होना पड़ा। बायजूस ने स्टेडियम किराए पर लिये। वे 6 स्क्रीन के बीच खड़े रहकर बच्चों को मैथ्स पढ़ाते थे। रवींद्रन ने दिल्ली के इंदिया गांधी इनडोर स्टेडियम में भी स्टूडेंट्स को पढ़ाया था। यहां 25,000 स्टूडेंट्स आए थे। इस तरह यह दुनिया का सबसे बड़ा क्लासरूम बन गया था।
सिर्फ 7 साल में अरबपति बन गए थे रवींद्रन
जब व्यस्तता ज्यादा बढ़ने लगी तो बायजू ने सोचा कि क्यों ना एक ही जगह रहकर सभी स्टूडेंट्स तक पहुंचा जाए। इसके बाद उन्होंने साल 2009 में CAT के ऑनलाइन वीडियो बेस्ड लर्निंग प्रोग्राम शुरू किया । इसके बाद साल 2011 में उन्होंने थिंक एंड लर्न नाम से एक स्टार्टअप लॉन्च किया, जो कि बायजूस की मूल कंपनी है। साल 2015 में उन्होंने बायजूस- द लर्निंग ऐप शुरू किया। यह स्टार्टअप के लिए गेमचेंजर साबित हुआ। इसका असर यह था कि रविंद्रन सिर्फ 7 साल में अरबपति बन गए थे। और फिर यह सिलसिला चलता ही गया।
22 से घटकर 5.1 अरब डॉलर पर आ गई वैल्यूएशन
आज बायजूस देश की सबसे बड़ी एजुकेशन टेक्नोलॉजी कंपनी है। सितंबर 2023 तक बायजूस की वैल्यूएशन 5.1 अरब डॉलर थी। कंपनी का दावा है कि उसके पास 15 करोड़ रजिस्टर्ड स्टूडेंट्स हैं। हालांकि, साल 2023 बायजूस के लिए अच्छा नहीं रहा। कंपनी की वैल्यूएशन 22 अरब डॉलर से घटकर 5.1 अरब डॉलर पर आ गई। इस तरह वैल्यूएशन में करीब 75 फीसदी की गिरावट आई है। कंपनी अपने यूएस यूनिट को भी बेचने की तैयारी कर रही है।











