पाकिस्तान की ओर से कप्तान फातिमा सना (21) और सलामी बल्लेबाज मुनीबा अली (15) ही दोहरे अंक में पहुंच पाईं। टीम ने अंतिम पांच विकेट सिर्फ चार रन जोड़कर गंवाए। इस जीत से न्यूजीलैंड की टीम ग्रुप ए में चार मैच में तीन जीत से छह अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहते हुए सेमीफाइनल में पहुंची। ऑस्ट्रेलिया की टीम शीर्ष पर रही। न्यूजीलैंड की जीत के साथ भारत और पाकिस्तान का अंतिम चार में जगह बनाने का सपना भी टूट गया।
पूरे मैच को देखेंगे तो लगेगा कि पाकिस्तान यह सोचकर उतरा था कि अगर सेमीफाइनल में हम नहीं पहुंचे तो भारत को भी नहीं पहुंचने देंगे। दरअसल, पूरी पाकिस्तान की पारी को देखेंगे तो पाएंगे कि 9 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर सकीं। सिर्फ कप्तान सना फातिमा ही थीं, जिन्होंने कुछ अच्छे शॉट लगाए। बल्लेबाजों की ऐसी सोच कभी नहीं दिखी कि यह मैच जीतना है। जो भी आता घटिया शॉट खेलकर चला जाता। दो बल्लेबाज तो रन आउट हुईं। इस तरह का मामला इंटरनेशनल क्रिकेट में कम ही देखने को मिलता है।
यही नहीं, गेंदबाजी के दौरान भी इस टीम ने 8 कैच छोड़े। अगर इसमें से आधे भी पकड़ लेते तो शायद न्यूजीलैंड 80 से कम रन पर आउट हो जाती। इस लक्ष्य का उस पर दबाव नहीं दिखता। यह हर कोई जानता था कि अगर पाकिस्तान सिर्फ जीत भी जाती है तो भारत सेमीफाइनल में पहुंच जाएगा। हॉकी एशियाड इसका ताजा उदाहरण है भारतीय टीम चीन से लोहा ले रही थी और पाकिस्तान टीम चीन को सपोर्ट करने के लिए स्टेडियम में चीनी झंडे लेकर पहुंची थी।
खैर, अब न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया इस ग्रुप से सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है, जबकि दोनों टीमों से हारने वाली टीम इंडिया को घर लौटना पड़ेगा। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम का हाथ इस बार फिर खाली रह गया है। उसे अपने प्रदर्शन की समीक्षा करने की जरूरत है। ओपनर स्मृति मंधाना को खुद से सवाल पूछने की जरूरत है कि अगर आपका बल्ला विश्व कप में नहीं चल रहा है तो क्या गलती हुई है?











