4 सरकारी संस्थान बेचेंगे यूटीआई एएमसी में 45% हिस्सेदारी, खरीदारों में क्यों सबसे आगे है टाटा ग्रुप?

4 सरकारी संस्थान बेचेंगे यूटीआई एएमसी में 45% हिस्सेदारी, खरीदारों में क्यों सबसे आगे है टाटा ग्रुप?
नई दिल्ली : चार सरकारी संस्थानों पंजाब नेशनल बैंक (PNB), एलआईसी (LIC), एसबीआई (SBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) के पास यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी में 45 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है। ये सरकारी संस्थान अब यूटीआई एएमसी (UTI AMC) में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं। इसके लिए ये औपचारिक बोलियां इनवाइट करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मामले से जुड़े शीर्ष अधिकारियों ने ईटी को यह जानकारी दी है। इंडस्ट्री सोर्सेज के अनुसार इन संस्थानों ने हाल ही में बिक्री प्रक्रिया शुरू करने के लिए मर्चेंट बैंकर तय किये हैं।


टाटा ग्रुप खरीदना चाहता है हिस्सेदारी


इससे पहले खबर आई थी कि टाटा ग्रुप (Tata Group) इन चारों सरकारी संस्थानों से यूटीआई एएमसी में बहुसंख्यक हिस्सेदारी खरीदने के लिए चर्चा कर रहा है। लेकिन फिर औपचारिक बोली प्रक्रिया का पालन करने पर जोर देने के बाद यह बातचीत फेल हो गई। साथ ही कुछ मुद्दे भी थे, जिन्हें सुलझाया जाना था। मामले से जुड़े अधिकारी ने बताया कि अब टाटा ग्रुप यूटीआई एएमसी के लिए ताजा बोली लगाएगा।

टाटा क्यों करना चाहता है यह सौदा?


हालांकि, यूटीआई एएमसी ने पहले चार सरकारी स्पांसर्स द्वारा हिस्सेदारी बेचने की बात से इनकार किया था। लेकिन टाटा ग्रुप इन चार सरकारी वित्तीय संस्थानों से यूटीआई एएमसी में 45 फीसदी हिस्सेदारी खरीदना चाहता है। क्योंकि ग्रुप का मौजदा एसेट मैनेजमेंट बिजनस अभी बहुत छोटा है। एसेट मैनेजमेंट बिजनस में एक अहम प्लेयर बनने के लिए टाटा ग्रुप को अपना बिजनस बड़ा करना पड़ेगा। इसे तेजी से करने के लिए एकमात्र रास्ता विलय और अधिग्रहण का ही है।

गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर


बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर गुरुवार को यूएटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी का शेयर (UTI AMC Share) बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुआ। यह 2.34 फीसदी या 16.50 रुपये की गिरावट के साथ 690.10 रुपये पर बंद हुआ था। इस शेयर का 52 वीक हाई 907 रुपये और 52 वीक लो 595 रुपये है।

दीपम ने जारी किये थे दिशानिर्देश


पिछले साल सितंबर में निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने सरकारी कंपनियों के लिए अपने डाउनस्ट्रीन निवेश से निपटने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किये थे। राज्य की संस्थाओं को अधिक स्वायत्तता देते हुए सरकार ने संबंधित बोर्डों से योग्य बोलीदाताओं पर पूरी तरह से उचित परिश्रम का पालन करने के लिए कहा है।
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