ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1.5 करोड़ बैरल से ज्यादा रूसी तेल भारतीय तटों के बेहद करीब है। इससे भारत को तुरंत तेल की कमी पूरी करने का मौका मिल जाएगा। यह तेल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में एक दर्जन से ज्यादा जहाजों पर लदा है। यह तेल बिका नहीं है या किसी खास बंदरगाह के लिए नहीं चला है। यह तेल एक हफ्ते या उससे भी कम समय में भारत पहुंच सकता है।
सबसे बड़ा सप्लायर
साथ ही भारत को 7 मिलियन बैरल और रूसी तेल एक हफ्ते में मिल सकता है। यह तेल 8 टैंकरों में लदा है जो फिलहाल सिंगापुर में हैं। इतना ही नहीं, भूमध्य सागर और स्वेज नहर से कई और टैंकर पूर्व की तरफ बढ़ रहे हैं। ये टैंकर एक महीने से भी कम समय में भारत पहुंच सकते हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बना हुआ है। हालांकि अमेरिका के दबाव में भारत ने हाल में रूस से तेल की खरीदारी कम की है और पश्चिम एशिया से खरीदारी बढ़ाई है।- अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में खड़े हैं 12 टैंकर
- इनमें 15 मिलियन बैरल रूसी तेल भरा हुआ है
- साथ ही सिंगापुर में भी 7 जहाजों ने लंगर डाला है
- ये सभी जहाज एक हफ्ते में भारत पहुंच सकते हैं
लेकिन पश्चिम एशिया में लड़ाई के कारण वहां से तेल की सप्लाई बाधित हुई है। डेटा इंटेलीजेंस फर्म Kpler के आंकड़ों के मुताबिक रूसी तेल से भरे करीब 18 टैंकर भारत की तरफ बढ़ रहे हैं। फर्म में एनालिस्ट सुमित रितोलिया ने कहा कि रिफाइनर्स नियर टर्म में रोजाना 20 लाख बैरल से ज्यादा तेल खरीद सकते हैं। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से पहले रूसी कच्चा तेल डिस्काउंट पर मिल रहा था और चीन ने इसका फायदा उठाते हुए जमकर खरीदारी की।











